नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल का आज, 12 दिसंबर को महाराष्ट्र के लातूर स्थित उनके आवास पर निधन हो गया। वे 91 वर्ष के थे और उम्र संबंधी बीमारियों के कारण देखभाल में थे। सुबह लगभग 6:30 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।
भारतीय राजनीति में शिवराज पाटिल एक प्रमुख और सम्मानित नाम रहे हैं। अपने लंबे राजनीतिक जीवन में उन्होंने केंद्र और राज्य, दोनों स्तरों पर कई महत्वपूर्ण पदों को संभाला। वे लातूर लोकसभा सीट से लगातार सात बार चुनकर संसद पहुंचे और उनके कार्यकाल को सुचारू, संयमित और संवैधानिक आचरण के लिए जाना जाता है।
पाटिल लोकसभा के 10वें स्पीकर रहे और 2004 से 2008 तक देश के केंद्रीय गृह मंत्री भी रहे। 26/11 के मुंबई आतंकी हमलों के बाद सुरक्षा चूक की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए उन्होंने गृह मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके अलावा वे पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक (2010–2015) जैसे संवैधानिक पदों पर भी नियुक्त हुए।
संसद में उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मान देने वाली परंपरा आउटस्टैंडिंग पार्लियामेंटेरियन अवार्ड की शुरुआत का श्रेय भी शिवराज पाटिल को दिया जाता है। उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शोक व्यक्त किया और उन्हें एक अनुभवी, विनम्र तथा समाजहित के प्रति समर्पित नेता बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि पाटिल जी से उनकी कई बार सार्थक बातचीत हुई और उनका योगदान सार्वजनिक जीवन में सदैव याद रखा जाएगा।
12 अक्टूबर 1935 को महाराष्ट्र के लातूर जिले के चाकुर गांव में जन्मे शिवराज पाटिल का सार्वजनिक जीवन चार दशकों से अधिक समय तक प्रभावशाली और सक्रिय रहा। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठतम नेताओं में शामिल थे और संसदीय परंपराओं को सुदृढ़ करने में उनकी भूमिका हमेशा याद की जाएगी।