लखनऊ। प्रयागराज में चल रहे माघ मेले के दौरान पालकी विवाद के बीच ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को लेकर अहम टिप्पणी की है। उन्होंने केशव प्रसाद मौर्य की सराहना करते हुए कहा कि वे हालात को समझने वाले नेता हैं और उन्हें यह बोध है कि इस पूरे प्रकरण में प्रशासनिक स्तर पर चूक हुई है। शंकराचार्य ने कहा कि जो व्यक्ति गलती को स्वीकार कर हालात को संभालने की कोशिश करे, वही मुख्यमंत्री पद के योग्य होता है। जिद या अहंकार के साथ फैसले लेने वाला व्यक्ति इस जिम्मेदारी के लिए उपयुक्त नहीं होता। उनके इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
केशव मौर्य को बताया समझदार नेता
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बातचीत के दौरान कहा कि उपमुख्यमंत्री यह समझते हैं कि मामले को तूल देने के बजाय उसे सुलझाया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि केशव प्रसाद मौर्य जानते हैं कि इस विवाद से पार्टी को नुकसान हो सकता है और इसी सोच के चलते वे संतुलित बयान दे रहे हैं। उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि यदि कुछ राजनीतिक दल उनके करीब आ रहे हैं, तो इसमें उनकी कोई भूमिका नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर वे पास आ रहे हैं, तो सत्तारूढ़ दल दूरी क्यों बना रहा है।
शिविर के बाहर जारी है शंकराचार्य का धरना
गौरतलब है कि मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य के समर्थकों और पुलिस प्रशासन के बीच तनातनी हो गई थी, जिसके बाद उन्होंने संगम में स्नान नहीं किया। तभी से वे अपने शिविर के बाहर धरने पर बैठे हुए हैं। मौनी अमावस्या के बाद उन्होंने बसंत पंचमी पर भी स्नान नहीं किया और उनका विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है। शंकराचार्य का कहना है कि जब तक उन्हें पूरे सम्मान के साथ संगम स्नान के लिए नहीं ले जाया जाएगा, तब तक वे अपना धरना समाप्त नहीं करेंगे।
डिप्टी सीएम का बयान भी आया सामने
इस पूरे मामले पर उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य का भी बयान सामने आया है। उन्होंने शंकराचार्य को प्रणाम करते हुए संगम में स्नान करने का आग्रह किया था। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में संतों के सम्मान की परंपरा रही है और यदि कहीं कोई चूक हुई है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, इससे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा दिए गए एक विवादित बयान के बाद प्रदेश की राजनीतिक सरगर्मी और तेज हो गई थी।