पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। चुनाव आयोग ने राज्य प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि चुनाव प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कोलकाता में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में राज्य पुलिस के कानून-व्यवस्था प्रमुख विनीत गोयल से कई अहम सवाल किए। साथ ही नारकोटिक्स एडवाइजरी बोर्ड का गठन न होने पर भी नाराजगी जताई।
बैठक में चुनावी तैयारियों के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। चुनाव आयोग ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया, एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया, सीमा शुल्क, उत्पाद शुल्क और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो जैसी केंद्रीय एजेंसियों को भी सतर्क रहने की सलाह दी है। आयोग का साफ कहना है कि चुनाव के दौरान किसी भी तरह की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी।
मुख्य चुनाव आयुक्त ने अधिकारियों को यह भी बताया कि चुनाव से जुड़ी हर गतिविधि का डिजिटल रिकॉर्ड रखा जा रहा है। जिला मजिस्ट्रेट, पुलिस कमिश्नर और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को अपने दायित्व पूरी गंभीरता और जिम्मेदारी के साथ निभाने के निर्देश दिए गए हैं। आयोग ने चेताया कि चुनाव के बाद यदि कहीं हिंसा या अव्यवस्था की स्थिति सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
बैठक के बाद चुनाव आयोग की टीम ने जिला मजिस्ट्रेटों के साथ अलग से चर्चा कर जमीनी स्तर पर तैयारियों की समीक्षा की। चुनाव आयोग की पूर्ण पीठ फिलहाल पश्चिम बंगाल के दौरे पर है, जहां मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और सुरक्षा व्यवस्थाओं का जायजा लिया जा रहा है। इधर विपक्षी दल पहले ही कम चरणों में मतदान और हिंसा-मुक्त चुनाव की मांग कर चुके हैं। ताजा जानकारी के अनुसार, पश्चिम बंगाल में चुनाव 2 से 3 चरणों में कराए जा सकते हैं।
चुनाव आयोग के इस दौरे के बाद जल्द ही चुनाव कार्यक्रम का ऐलान संभव है। संभावना जताई जा रही है कि 13 से 15 मार्च के बीच चुनाव आयोग प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुनाव की तारीखों की घोषणा कर सकता है। राज्य की 294 विधानसभा सीटों पर मतदान होना है। फिलहाल तारीखों का आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन चुनाव अप्रैल–मई 2026 में कराए जाने की संभावना है। वर्तमान विधानसभा का कार्यकाल 7 मई 2026 को समाप्त हो रहा है।