कानपुर में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों, जिन्हें Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026 कहा जा रहा है, के खिलाफ विरोध का एक अनोखा और भावुक मामला सामने आया है। सत्ताधारी दल भाजपा के युवा मोर्चा के मंडल उपाध्यक्ष आकाश ठाकुर ने इस नियमावली का विरोध करने के लिए अपने खून से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। यह घटना देश भर में UGC के इन नियमों के खिलाफ बढ़ते विरोध को और अधिक तीव्र कर रही है, जहां छात्र, शिक्षक, सामाजिक संगठन और अब सत्ताधारी दल के भीतर से भी मजबूत आवाजें उठ रही हैं।
UGC की यह नई नियमावली 15 जनवरी 2026 से लागू हो चुकी है। इसका मुख्य उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव, लिंग भेदभाव, विकलांगता आदि आधारित भेदभाव को रोकना और समानता को बढ़ावा देना है। नियमों के अनुसार हर विश्वविद्यालय और कॉलेज में Equal Opportunity Centre (समान अवसर केंद्र) स्थापित करना अनिवार्य है। भेदभाव की शिकायतों के निपटारे के लिए विशेष समितियां गठित की जानी हैं, 24 घंटे हेल्पलाइन शुरू करनी है और मॉनिटरिंग स्क्वॉड बनाना है। UGC का दावा है कि 2019-2023 के बीच भेदभाव की शिकायतों में 118 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, खासकर SC, ST और OBC छात्रों से जुड़ी, इसलिए ये कड़े उपाय आवश्यक हैं।
लेकिन इस नियमावली का व्यापक विरोध हो रहा है, विशेष रूप से सामान्य वर्ग (सवर्ण) समाज से। विरोध करने वाले इसे एकतरफा बता रहे हैं क्योंकि समितियों में SC/ST/OBC/महिला/विकलांगों का प्रतिनिधित्व अनिवार्य है, लेकिन सामान्य वर्ग के लिए कोई स्पष्ट सुरक्षा व्यवस्था नहीं है। उनका कहना है कि इससे कॉलेजों में छात्रों के बीच जातिगत आधार पर भेदभाव बढ़ेगा, गलत शिकायतों से निर्दोष छात्र (खासकर सवर्ण) प्रभावित होंगे और संस्थानों में अराजकता फैलेगी। कई शहरों में प्रदर्शन हो रहे हैं, दिल्ली में UGC मुख्यालय का घेराव हुआ है, लखनऊ, जयपुर आदि जगहों पर सवर्ण संगठन एकजुट हो रहे हैं। कुछ जगहों पर भाजपा के राजनैतिक पदाधिकारियों ने इस्तीफे दिए हैं और सुप्रीम कोर्ट में PIL भी दाखिल की गई है।
कानपुर में भाजपा युवा मोर्चा के आकाश ठाकुर ने इस विरोध को बेहद भावुक तरीके से व्यक्त किया। उन्होंने अपने खून से लिखे पत्र में प्रधानमंत्री मोदी से अपील की कि इस नियमावली पर पुनर्विचार किया जाए। ठाकुर का मानना है कि यह नियम भविष्य में समाज और शिक्षण संस्थानों में भेदभाव को बढ़ावा दे सकता है। उनका कहना है कि कॉलेजों में छात्रों के बीच जातिगत अलगाव पैदा होगा, जिससे समाज में जहर घुलेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते संशोधन नहीं हुआ तो लोग एक-दूसरे से घृणा करने लगेंगे, जो देश के लिए खासकर सामान्य वर्ग और सवर्ण समाज के छात्रों के बीच घातक साबित होगा।
आकाश ठाकुर ने पत्र में यह भी लिखा कि वे भाजपा के समर्पित कार्यकर्ता हैं, लेकिन देशहित में यह आवाज उठाना जरूरी समझा। उनका यह कदम UGC नियमों के विरोध में अब तक का सबसे प्रतीकात्मक और भावुक विरोध माना जा रहा है। UGC के नए नियम अब सिर्फ छात्र-शिक्षक का मुद्दा नहीं रह गए, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बड़ी बहस का विषय बन चुके हैं।
देश भर में विरोध तेज होने के साथ सरकार स्तर पर भी चर्चा चल रही है। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि नियमों में संतुलन की जरूरत है, ताकि भेदभाव रोकने के नाम पर नई असमानता न पैदा हो। UGC का पक्ष है कि नियम सभी के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए हैं, न कि किसी वर्ग के खिलाफ। लेकिन विरोधियों की मांग है कि नियमों में संशोधन कर सभी वर्गों को सुरक्षा दी जाए।
रिपोर्ट : अनुराग श्रीवास्तव कानपुर संवाददाता