लखनऊ: उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) द्वारा आयोजित प्रारम्भिक अहर्ता परीक्षा (PET) को लेकर प्रतियोगी छात्रों और कर्मचारियों ने न्यूनतम व युक्तिसंगत कट-ऑफ तय करने की मांग की है। इस संबंध में 22 दिसंबर 2025 को आयोग के अध्यक्ष को एक ज्ञापन सौंपा गया।
ज्ञापन में अभ्यर्थियों ने कहा कि PET परीक्षा का उद्देश्य केवल अहर्ता (क्वालिफाइंग) परीक्षा होना है, न कि अंतिम चयन का आधार। लेकिन यदि इसमें अत्यधिक कट-ऑफ निर्धारित की जाती है, तो बड़ी संख्या में योग्य उम्मीदवार आगामी मुख्य परीक्षाओं और भर्तियों से वंचित हो जाते हैं, जिससे PET के मूल उद्देश्य पर असर पड़ता है।
अभ्यर्थियों ने अपने निवेदन में बताया कि PET विभिन्न विभागों की भर्तियों में शामिल होने का मुख्य माध्यम है। ऐसे में उच्च कट-ऑफ तय होने से ग्रामीण क्षेत्रों के उम्मीदवार, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग और सामान्य योग्य अभ्यर्थी बाहर हो जाते हैं। यह संविधान के अनुच्छेद 14 से 16 में दिए गए समान अवसर के अधिकार की भावना के भी विपरीत है। ज्ञापन में यह भी कहा गया कि यदि PET में न्यूनतम और व्यावहारिक कट-ऑफ रखी जाती है, तो विभागों को भी अधिक संख्या में योग्य अभ्यर्थियों में से चयन करने का अवसर मिलेगा। इससे भर्ती प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और प्रभावी बन सकेगी।
अभ्यर्थियों ने आयोग से आग्रह किया है कि PET को उसके मूल स्वरूप के अनुरूप केवल अहर्ता परीक्षा के रूप में संचालित किया जाए और अधिकतम उम्मीदवारों को मुख्य परीक्षा व आगे की भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने का मौका दिया जाए। यह ज्ञापन मोनू पाण्डेय की ओर से समस्त प्रतियोगी छात्रों और कर्मचारियों की ओर से प्रस्तुत किया गया। अभ्यर्थियों ने उम्मीद जताई है कि आयोग उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेगा।


