नई दिल्ली। दिल्ली सीमा के पास पकड़े गए आतंकी शब्बीर अहमद लोन से पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। जांच एजेंसियों के मुताबिक, लोन ने राजधानी दिल्ली में कई महत्वपूर्ण स्थानों की रेकी की थी, जिनमें कालकाजी मंदिर, लोटस टेम्पल और छतरपुर मंदिर जैसे प्रमुख धार्मिक स्थल शामिल हैं। इसके अलावा उसने कनॉट प्लेस का भी वीडियो तैयार कर पाकिस्तान भेजा था।
पूछताछ में लोन ने यह भी बताया कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज़ इंटेलिजेंस (ISI) ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ की तर्ज पर एक नया आतंकी संगठन खड़ा करना चाहती थी। लोन इसी साजिश का हिस्सा था और उसे भारत में नेटवर्क तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई थी।
जांच में सामने आया है कि लोन पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के हैंडलर्स के संपर्क में था, जो एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स के जरिए उससे संवाद करते थे। पहचान छिपाने के लिए वह लगातार अपने डिजिटल प्रोफाइल बदलता रहता था, लेकिन एक मोबाइल नंबर के जरिए एजेंसियों ने उसके नेटवर्क का पता लगा लिया।
सूत्रों के अनुसार, लोन को आतंकी संगठन में शामिल करने के बाद उसे विभिन्न चरणों में ट्रेनिंग दी गई। इसमें बेसिक से लेकर एडवांस स्तर तक हथियारों के इस्तेमाल, विस्फोटक तैयार करने और वैचारिक रूप से कट्टर बनाने का प्रशिक्षण शामिल था। जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि लोन को पाकिस्तान के मुजफ्फराबाद स्थित कैंप में विशेष प्रशिक्षण के लिए भेजा गया था। बाद में ISI ने उसे बांग्लादेश भेजा, जहां उसने भारत विरोधी गतिविधियों के लिए एक ऑपरेशनल नेटवर्क खड़ा करने की कोशिश की।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, मार्च 2025 में लोन अपने परिवार के साथ भारत-बांग्लादेश सीमा पार कर बांग्लादेश के सैदपुर इलाके में बस गया। वहां उसने अपनी पहचान छिपाने के लिए एक स्थानीय महिला से शादी भी की और आतंकी गतिविधियों के लिए ‘लॉन्चिंग बेस’ तैयार किया। जांच एजेंसियों का कहना है कि लोन भारत के अलग-अलग राज्यों से युवाओं को जोड़कर एक बड़ा नेटवर्क तैयार करने की कोशिश कर रहा था। फिलहाल उससे पूछताछ जारी है और कई अन्य अहम खुलासों की उम्मीद जताई जा रही है।