हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विपक्ष पर किसानों को लेकर “गलत जानकारी” फैलाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने फसल खरीद प्रक्रिया को आसान और पारदर्शी बनाने के लिए कई बड़े सुधार किए हैं, जबकि विपक्ष इसे गलत तरीके से पेश कर रहा है। राज्य मंत्रिमंडल की बैठक के बाद सीएम सैनी ने बताया कि सभी अनाज मंडियों में नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई है और वरिष्ठ अधिकारियों को नियमित निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है। जिलों के उपायुक्तों को खरीद व्यवस्था का प्रभारी बनाया गया है, ताकि प्रक्रिया सुचारु रूप से चल सके। उन्होंने किसानों से इन व्यवस्थाओं में सहयोग करने की अपील भी की।
वहीं कांग्रेस नेता भूपिंदर सिंह हुड्डा ने सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि मंडियों में अव्यवस्था का माहौल है। उनका कहना है कि किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए कई तरह की शर्तों और प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ रहा है, जिससे उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है और कई दिनों तक इंतजार करना पड़ता है।
सीएम सैनी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सरकार द्वारा लागू किए गए उपायों से खरीद प्रणाली अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और किसान हितैषी बनेगी। उन्होंने बताया कि नई व्यवस्था के तहत तीन-स्तरीय फसल सत्यापन प्रणाली लागू की गई है, जिसमें किसानों की पंजीकृत फसल का मिलान और आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन शामिल है। सरकार के अनुसार, 8 अप्रैल तक मंडियों में पहुंचे 75 प्रतिशत गेहूं का सफलतापूर्वक बायोमेट्रिक सत्यापन किया जा चुका है। किसानों की सुविधा के लिए तीन अधिकृत व्यक्तियों को भी सत्यापन की अनुमति दी गई है।
इसके अलावा मंडियों और गोदामों में जियो-फेंसिंग लागू की गई है, जिससे अनधिकृत गतिविधियों पर नजर रखी जा सके। अब तक 416 गेहूं मंडियों, 112 सरसों मंडियों और 179 अतिरिक्त स्थानों को जियो-फेंस किया जा चुका है। साथ ही 1,344 भंडारण स्थलों को भी इस दायरे में लाया गया है।
नई व्यवस्था के तहत एंट्री गेट पास जारी करते समय वाहन का नंबर और तस्वीर अनिवार्य कर दी गई है। हालांकि जिन मामलों में वाहन नंबर उपलब्ध नहीं है, वहां केवल तस्वीर के आधार पर भी गेट पास जारी किया जा सकता है। मंडियों से स्टॉक बाहर ले जाने के लिए ट्रांसपोर्टर और मार्केट कमेटी सचिव की मंजूरी जरूरी की गई है। सीएम सैनी ने बताया कि 8 अप्रैल तक कुल 1,74,635 एग्जिट गेट पास जारी किए जा चुके हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि नई प्रणाली के तहत खरीद प्रक्रिया लगातार जारी है।