हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र में राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान वंदेमातरम् को लेकर सदन में तीखी बहस और हंगामा देखने को मिला। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के बयान के बाद कांग्रेस विधायकों ने विरोध जताते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया। मुख्यमंत्री सैनी ने कहा कि वर्ष 1937 में मुस्लिम लीग के विरोध के चलते जवाहरलाल नेहरू ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को पत्र लिखकर वंदेमातरम् को मुस्लिम भावनाओं के विरुद्ध बताया था। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय कांग्रेस ने मुस्लिम लीग के सामने समझौता किया और वंदेमातरम् के स्वरूप में बदलाव किया।
मुख्यमंत्री के बयान के दौरान कांग्रेस विधायकों ने हंगामा किया। उस समय विपक्ष के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा सदन में मौजूद नहीं थे। स्पीकर हरविन्द्र कल्याण ने विधायकों को शांत कराने का प्रयास किया, लेकिन हंगामा जारी रहने पर कांग्रेस विधायकों ने वॉकआउट कर दिया। हालांकि कुछ देर बाद वे फिर सदन में लौट आए।
सीएम सैनी ने कहा कि विपक्ष सरकार से सवाल पूछता है, लेकिन जब जवाब दिया जाता है तो उसे सुनने के बजाय वॉकआउट कर देता है। उन्होंने कहा कि राजनीति बापू की भावनाओं पर भारी पड़ गई थी और मुस्लिम लीग के विरोध के कारण वंदेमातरम् को लेकर कांग्रेस ने समीक्षा शुरू की थी। मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि 1937 में कांग्रेस का यह रुख किस प्रकार का था। उन्होंने कहा कि उस समय कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में वंदेमातरम् के उपयोग की समीक्षा की बात कही गई थी, जिससे पूरे देश में विरोध हुआ और प्रभात फेरियां निकाली गईं।
सीएम ने कहा कि कांग्रेस विधायकों ने राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान वंदेमातरम् पर कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि इस बार के अधिवेशन की शुरुआत वंदेमातरम् से होना गर्व की बात है और देश इस गीत के 150 वर्ष पूरे होने का साक्षी बन रहा है। उन्होंने कहा कि वंदेमातरम् राष्ट्र की आत्मा और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक है, जिसने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान युवाओं में ऊर्जा और साहस भरा। मुख्यमंत्री ने कहा कि 150 वर्ष केवल समय का पड़ाव नहीं, बल्कि राष्ट्र के स्वाभिमान और पुनर्जागरण की गाथा है। भारत अपने मूल्यों से कभी समझौता नहीं करेगा।