प्रयागराज। 23 साल जेल में बिताने के बाद एक व्यक्ति को पत्नी और तीन बच्चों की हत्या के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी का अपराध संदेह से परे साबित नहीं कर सका। जस्टिस सिद्धार्थ और जस्टिस जय कृष्ण उपाध्याय की खंडपीठ ने 16 फरवरी को दिए फैसले में इस प्रकरण को देश की आपराधिक न्याय व्यवस्था पर दुखद टिप्पणी बताया। खंडपीठ ने कहा कि न्याय व्यवस्था में वास्तविक सुधार के लिए जजों की संख्या बढ़ाना, सहायक स्टाफ की नियुक्ति और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराना बेहद आवश्यक है। केवल बैठकें और सम्मेलन करने से हालात नहीं बदलेंगे।
रिहाई के बाद असली कष्ट शुरू होगा
कोर्ट ने रईस को बरी करते हुए भावनात्मक टिप्पणी भी की। अदालत ने कहा कि भले ही वह अब रिहा हो रहा है, लेकिन उसकी असली सजा अभी खत्म नहीं हुई है। इतने वर्षों बाद जब वह बाहर आएगा तो उसके माता-पिता और भाई-बहन शायद जीवित न हों। उसकी पत्नी और तीन बच्चों की पहले ही मौत हो चुकी है। उसका बेटा अजीम, जो अब 25-26 साल का हो चुका है, पिता को स्वीकार करेगा या नहीं, यह भी निश्चित नहीं है।
2003 में हुई थी चार हत्याएं
पुलिस के अनुसार 29-30 अगस्त 2003 की रात घरेलू विवाद के बाद रईस ने कथित तौर पर पत्नी और तीन बच्चों की चाकू से गला काटकर हत्या कर दी थी। मृतका के चाचा की तहरीर पर मामला दर्ज हुआ था। निचली अदालत ने रईस को चार हत्याओं का दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी, जिसके खिलाफ उसने हाईकोर्ट में अपील की।
5 साल के बेटे की गवाही पर उठे सवाल
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान पूरे साक्ष्यों की दोबारा जांच हुई। मामले में एकमात्र चश्मदीद गवाह आरोपी का बेटा अजीम था, जो घटना के समय पांच साल का था। जिरह के दौरान उसने स्वीकार किया कि उसने रिपोर्ट लिखाने वाले चाचा और सरकारी वकील के कहने पर बयान दिया था। उसने यह भी कहा कि यदि वह वैसा बयान नहीं देता तो चाचा उसे घर से निकाल देते।कोर्ट ने यह भी नोट किया कि मृतका के चाचा और रईस के बीच जमीन को लेकर पुराना विवाद था, जिससे उनकी मंशा पर संदेह पैदा हुआ।
हथियार पर भी मेल नहीं खाते थे सबूत
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में उल्लेख था कि गले पर गहरे घाव किसी भारी धारदार हथियार से किए गए थे, जिससे गर्दन लगभग अलग हो गई थी। जबकि पुलिस ने जो चाकू बरामद किया, वह साधारण था। अदालत ने कहा कि बरामद हथियार और मेडिकल साक्ष्य में स्पष्ट असंगति है। अपने फैसले में कोर्ट ने लिखा कि मां और तीन बच्चों की हत्या बेहद क्रूर और भयावह थी, लेकिन उपलब्ध साक्ष्य यह साबित नहीं करते कि यह अपराध रईस ने ही किया। ऐसे में संदेह का लाभ देते हुए उसे बरी किया जाता है। कोर्ट ने आदेश दिया कि यदि वह किसी अन्य मामले में वांछित नहीं है तो उसे तत्काल रिहा किया जाए।