लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के “कालनेमी” वाले बयान को लेकर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने तीखा पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि अब देश की जनता समझ चुकी है कि असली कालनेमी कौन है। माघ मेले में स्नान को लेकर शुरू हुआ विवाद अब संतों की पहचान, सनातन धर्म और सत्ता की जवाबदेही तक पहुंच गया है।
शंकराचार्य मौनी अमावस्या से ही संगम तट पर धरने पर बैठे हैं और उन्होंने बसंत पंचमी पर भी स्नान न करने का निर्णय लिया है। उनका कहना है कि उनके साथ अन्याय हुआ है और प्रशासन ने जानबूझकर दुर्भावना के साथ कार्रवाई की।
“बयान देने से पहले जवाबदेही निभाएं”
सीएम योगी पर निशाना साधते हुए शंकराचार्य ने कहा कि केवल बयानबाज़ी से काम नहीं चलेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारी मुख्यमंत्री को ग़लत दिशा में ले जा रहे हैं और असली मुद्दों से ध्यान भटकाया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि 12 वर्षों से सत्ता में रहते हुए भी अगर गौ-हत्या नहीं रुक पाई, तो इसकी जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
मेला प्रशासन से नाराज़गी
मेला प्रशासन के रवैये पर नाराज़गी जताते हुए शंकराचार्य ने कहा कि वे पिछले 40 वर्षों से माघ मेले में आते रहे हैं। पहले सुविधाएं मिलती थीं, अब हालात यह हैं कि वे फुटपाथ पर बैठे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार असली और नकली सनातन की बात कर रही है, जबकि वे स्वयं किसी सुख-सुविधा में नहीं, बल्कि धरने पर बैठे हैं और मुख्यमंत्री सत्ता की गद्दी संभाले हुए हैं।
उन्होंने साफ कहा कि केवल कुछ पुलिसकर्मियों को निलंबित कर देने से वे संतुष्ट नहीं होंगे। पूरे मामले में जो अपराध हुआ है, उस पर निष्पक्ष निर्णय होना चाहिए।
नोटिस से बढ़ा विवाद
विवाद की शुरुआत 18 जनवरी को हुई, जब मौनी अमावस्या के दिन स्नान के दौरान शंकराचार्य की पालकी को रोक दिया गया। इसके बाद मेला प्रशासन ने उनसे शंकराचार्य होने का प्रमाण मांगा और नोटिस जारी किया। दूसरे नोटिस में उन पर बैरियर तोड़ने और भीड़ में जबरन बग्घी ले जाने के आरोप लगाए गए, साथ ही माघ मेले से स्थायी प्रतिबंध की चेतावनी भी दी गई।
“संत की कोई निजी संपत्ति नहीं”
इस पूरे घटनाक्रम के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हरियाणा के सोनीपत में संतों के धर्म और कर्तव्य पर बयान देते हुए कहा था कि एक संन्यासी के लिए धर्म और राष्ट्र सर्वोपरि होते हैं। उन्होंने कहा था कि संत की कोई निजी संपत्ति नहीं होती और जो लोग धर्म की आड़ में सनातन को कमजोर करने की कोशिश करते हैं, उनसे सावधान रहने की जरूरत है।
केशव मौर्य की अपील
उधर, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने शंकराचार्य से स्नान करने और विवाद को समाप्त करने की अपील की है। उन्होंने शंकराचार्य के प्रति सम्मान जताते हुए कहा कि इस विषय का शांतिपूर्ण समाधान होना चाहिए। साथ ही उन्होंने विपक्ष पर हमला करते हुए दावा किया कि भाजपा का जनाधार लगातार मजबूत हो रहा है।