लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट ने रिजर्व पुलिस लाइन में तैनात रहे कॉन्स्टेबल सुनील कुमार शुक्ला को सेवा से बर्खास्त कर दिया है। विभागीय जांच में सोशल मीडिया के दुरुपयोग, अनुशासनहीनता और बिना साक्ष्य गंभीर आरोप लगाने का दोषी पाए जाने के बाद यह कार्रवाई की गई।
पुलिस की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, सुनील कुमार शुक्ला ने कुछ समय पहले सोशल मीडिया पर कई वीडियो जारी कर विभाग के भीतर अवैध वसूली और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। उन्होंने दावा किया था कि ड्यूटी बदलने के बदले पुलिसकर्मियों से हर महीने पैसे लिए जाते हैं।
जांच में नहीं मिले आरोपों के सबूत
मामले की गंभीरता को देखते हुए 7 मई को एक जांच समिति गठित की गई थी। समिति ने संबंधित पुलिसकर्मियों के बयान दर्ज किए और सभी पक्षों को अपने साक्ष्य पेश करने का मौका दिया।
जांच के दौरान आरक्षी सुनील कुमार शुक्ला अपने आरोपों के समर्थन में कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सके। विभागीय रिपोर्ट में कहा गया कि उन्होंने बिना प्रमाण वरिष्ठ अधिकारियों पर सार्वजनिक रूप से आरोप लगाकर विभाग की छवि खराब करने की कोशिश की।
सोशल मीडिया नीति उल्लंघन का आरोप
जांच में यह भी पाया गया कि कॉन्स्टेबल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल विभागीय नियमों के खिलाफ किया। पुलिस के मुताबिक उन्होंने अधिकारियों के खिलाफ अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया और उत्तर प्रदेश सोशल मीडिया नीति-2023 समेत कई सेवा नियमों का उल्लंघन किया।
इसके बाद विभाग ने उन्हें पुलिस सेवा से बर्खास्त करने का फैसला लिया।
कौन हैं सुनील कुमार शुक्ला?
सुनील कुमार शुक्ला मूल रूप से अमेठी जिले के गौरीगंज के रहने वाले हैं और वर्ष 2015 बैच के सिपाही थे। वह लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट की रिजर्व पुलिस लाइन में तैनात थे।
उन्होंने फेसबुक समेत अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वीडियो जारी कर आरोप लगाया था कि पुलिस विभाग के भीतर ड्यूटी और तैनाती के नाम पर वसूली होती है। उनके बयान के बाद मामला काफी चर्चा में आया था।
पहले भी हुई थी कार्रवाई
इस मामले के सामने आने के बाद विभाग ने एक महिला हेड कांस्टेबल समेत कई पुलिसकर्मियों के खिलाफ जांच शुरू की थी। वहीं गणना कार्यालय से जुड़े कुछ कर्मियों को हटाया भी गया था। हालांकि विभागीय जांच में सुनील कुमार शुक्ला के आरोपों की पुष्टि नहीं हो सकी।