हनुमान जयंती के दिन हनुमान जी के पंचमुखी अवतार की पूजा करने का भी विधान है। इनकी पूजा बहुत ही लाभकारी होती है। पंचमुखी हनुमान जी की पूजा हनुमान जयंती या फिर किसी भी मंगलवार के दिन की जा सकती है।
कैसा है हनुमान जी का यह रुप
रामायण के मुताबिक हनुमान जी के प्रत्येक मुख में तीन आंख और दो भुजाएं हैं। पंचमुखी हनुमान में पांच मुख नरसिंह, गरुड, अश्व, वानर और वराह रूप को दर्शाते हैं। इनके अनुसार कहा जाता है कि भगवान बजरंग बली अजर अमर है। इनके एक रुप यश, लंबी उम्र और धन संपत्ति भी मिलती है। इसके अलावा एक रूप से डय, भय दूर भागता है।
कैसे करें हनुमान जी की पूजा?
हनुमान जयंती के दिन मंगलवार की रात्रि में दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके बैठें। अपने सामने लाल कपड़े पर पंचमुखी बजरंग यंत्र स्थापित कर उसकी पूजा चमेली के इत्र, सिंदूर, लाल फूल से करें और लड्डू व फल अर्पित करें। पूजन के बाद तेल का दीपक जलाएं और सुगंधित धूप जला कर मूंगे की माला से इस मंत्र- ‘ऊं हुं हुं हसौं हस्फ्रें हुं हुं हनुमते नम:।’ का आठ दिन तक 21 माला जप करें। अंतिम दिन इसी मंत्र की 108 आहुतियां गाय के शुद्ध घी की अग्नि में देकर अनुष्ठान पूर्ण करें। इस साधना में ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करें, भूमि पर सोएं। जो भी प्रसाद चढ़ाएं, वह गाय के शुद्ध घी में शुद्धता से बना हो।
हनुमान जयंती का दिन बहुत ही मंगलकारी होता है। इस दिन हनुमान जी का जन्मोत्सव मनाया जाता है। कहा जाता है कि हनुमान जी की पूजा से यश, सुख समृद्धि तो बढ़ती ही साथ ही डर आदि भी दूर भागता है।