नई दिल्ली। बिहार के राजनीतिक घटनाक्रम में हुए बीते दिनों हुए बदलाव को लेकर सियासी हलकों में भूमिका की तलाश की जा रही है। नितीश कुमार ने एनडीए की साथ छोड़कर महागठबंधन के साथ सरकार बना ली है। बिहार में जदयू-एनडीए का गठबंधन टूटने के पीछे क्या चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर का हाथ है? जब यह सवाल खुद प्रशांत किशोर (पीके) से पुछा गया तो उन्होंने कहा कि जदयू और महागठबंधन के मेल में उनका कोई योगदान नहीं है। पीके ने यह भी कहा कि उनकी ऐसी इच्छा भी नहीं है।
भाजपा के साथ खुश नहीं थे नीतीश कुमार
प्रशांत किशोर ने बताया कि नितीश कुमार भाजपा के साथ गठबंधन से खुश नजर नहीं आ रहे थे। जदयू और भाजपा के विचारों में मतभेद थे। उन्होंने यह भी कहा कि नितीश कुमार ने किस एजेंडे पर गठबंधन किया है, इसे जनता के सामने रखना चाहिए।
10 सालों में छठा प्रयोग
प्रशांत ने आगे कहा कि नितीश कुमार ने पिछले 10 सालों में छठा प्रयोग किया है। नितीश को इसका नुकसान हो रहा है। जदयू के अब 43 विधायक रह गए हैं। प्रशांत ने तंज कसते हुए कहा कि नितीश कुमार में ग्रोथ भी नहीं दिख रही है। उनके काम में कोई बदलाव नहीं आया है।
उन्होंने अब पाला बदल लिया है, इसका असर चुनाव में देखने को मिलेगा। बिहार की जनता अब नितीश कुमार के नाम पर वोट भी नहीं कर रही है। 2010 में उनका जो स्ट्राइक रेट था, वह भी अब लगातार कम हो रहा है।