नई दिल्ली। एशिया के खाड़ी क्षेत्र में जारी तनाव के बीच अब हालात और गंभीर होते नजर आ रहे हैं। ईरान लगातार अपने हमलों का दायरा बढ़ा रहा है और लंबी दूरी के ठिकानों को निशाना बनाने की कोशिश कर रहा है। इसी कड़ी में हिंद महासागर स्थित डिएगो गार्सिया मिलिट्री बेस पर हमले की खबर ने रणनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है।
बताया जा रहा है कि ईरान ने इस संयुक्त अमेरिकी-ब्रिटिश सैन्य अड्डे की ओर दो मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। यह बेस ईरान से करीब 4,000 किलोमीटर दूर है, जो उसकी सामान्य मिसाइल क्षमता से ज्यादा दूरी मानी जा रही है। हालांकि, राहत की बात यह है कि कोई भी मिसाइल लक्ष्य पर नहीं गिरी और न ही किसी के हताहत होने की खबर सामने आई है।
क्या है डिएगो गार्सिया का महत्व?
हिंद महासागर में स्थित डिएगो गार्सिया अमेरिका और ब्रिटेन का एक बेहद अहम सैन्य अड्डा है। यहां से दोनों देश एशिया और मध्य-पूर्व में अपने सैन्य ऑपरेशन संचालित करते हैं। ऐसे में इस बेस को निशाना बनाने की कोशिश को बड़े रणनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
ईरान की मिसाइल क्षमता पर सवाल
विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान के पास अभी इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) नहीं हैं, जिनकी रेंज 10,000 से 15,000 किलोमीटर तक होती है। ईरान की मौजूदा ‘शाहाब’ और ‘ग़द्र’ जैसी मिसाइलें करीब 2,000 से 2,500 किलोमीटर तक मार कर सकती हैं। ऐसे में डिएगो गार्सिया तक पहुंचने का दावा कई सवाल खड़े करता है। हालांकि, बीते कुछ वर्षों में ईरान ने अपनी मिसाइल तकनीक में तेजी से सुधार किया है और वह लंबी दूरी की क्षमता विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है।
क्या होती है ICBM की ताकत?
इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल सामान्य मिसाइलों से कहीं ज्यादा उन्नत होती हैं। इन्हें पहले रॉकेट के जरिए अंतरिक्ष की ऊंचाई तक भेजा जाता है, जहां से यह तय मार्ग पर चलकर दोबारा वायुमंडल में प्रवेश करती हैं और अपने लक्ष्य को सटीकता से भेदती हैं।
किन देशों के पास हैं ऐसी मिसाइलें?
दुनिया में कुछ ही देश हैं जिनके पास इतनी लंबी दूरी की मिसाइलें हैं। रूस की ‘सरमत’ मिसाइल करीब 18,000 किलोमीटर तक मार कर सकती है। वहीं अमेरिका और चीन के पास भी 13,000 से 15,000 किलोमीटर तक की क्षमता वाली मिसाइलें मौजूद हैं। उत्तर कोरिया भी इस तकनीक को विकसित करने में जुटा है, जबकि ईरान अभी इस दौड़ में पीछे माना जाता है।
ड्रोन बन रहे ईरान की सबसे बड़ी ताकत
रक्षा विशेषज्ञ कर्नल राजेश पवार के अनुसार, भले ही ईरान के पास ICBM न हों, लेकिन उसके ड्रोन हमले बेहद खतरनाक साबित हो रहे हैं। ये ड्रोन दुश्मन के रडार को चकमा देकर सटीक हमले करने में सक्षम हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका इस संघर्ष में जमीनी स्तर पर उतरता है, तो उसे भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। ईरान ने अपनी रक्षा तैयारियां इस तरह से की हैं कि किसी भी बड़े सैन्य अभियान की कीमत काफी भारी पड़ सकती है। कुल मिलाकर, मौजूदा हालात यह संकेत दे रहे हैं कि खाड़ी क्षेत्र में तनाव कम होने के बजाय और गहराता जा रहा है, जिससे वैश्विक सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ती जा रही हैं।