नई दिल्ली। ईरान में खिलाड़ियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय खेल जगत को चिंता में डाल दिया है। 19 वर्षीय पहलवान सालेह मोहम्मदी को फांसी दिए जाने के बाद अब वहां जेलों में बंद अन्य खिलाड़ियों की सुरक्षा और न्यायिक प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सालेह मोहम्मदी की फांसी पर उठे सवाल
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कांस्य पदक जीत चुके पहलवान सालेह मोहम्मदी को गुरुवार को दो पुलिसकर्मियों की हत्या के आरोप में फांसी दे दी गई। हालांकि मोहम्मदी ने अदालत में खुद को बेगुनाह बताया था। उनका कहना था कि उनसे जबरन कबूलनामा लिया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामले से जुड़े सीसीटीवी फुटेज और गवाहों के बयान भी अदालत में अहमियत नहीं पा सके। यह घटना 2018 के विरोध प्रदर्शनों के बाद फांसी पर चढ़ाए गए पहलवान नवीद अफकारी की याद दिला रही है, जिनका मामला भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी चर्चा में रहा था।
जेलों में बंद कई खिलाड़ी
ईरान में इस समय कई खिलाड़ी, कोच और खेल से जुड़े अधिकारी जेल में बंद हैं। इनमें फुटबॉल, बॉक्सिंग, मैराथन और अन्य खेलों से जुड़े नाम शामिल हैं। बताया जा रहा है कि इन खिलाड़ियों पर विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने या सरकार विरोधी गतिविधियों के आरोप लगाए गए हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ी चिंता
दुनियाभर के 200 से ज्यादा खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) से हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने एक पत्र लिखकर आरोप लगाया कि ईरान के खेल संगठन सुरक्षा एजेंसियों के प्रभाव में काम कर रहे हैं और खिलाड़ियों के मानवाधिकारों का उल्लंघन हो रहा है।
निष्पक्ष सुनवाई पर सवाल
मोहम्मदी की फांसी के बाद अब यह डर और गहरा गया है कि जेल में बंद अन्य खिलाड़ियों के मामलों में भी निष्पक्ष सुनवाई नहीं हो सकती। अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार इस मामले पर नजर बनाए हुए है और पारदर्शी जांच की मांग कर रहा है। ईरान में खेल और राजनीति के इस टकराव ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या खिलाड़ियों को अपनी अभिव्यक्ति की कीमत अपनी जान देकर चुकानी पड़ रही है।