नई दिल्ली। उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन ने एक बार फिर अमेरिका पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ अमेरिका के टकराव ने यह साबित कर दिया है कि परमाणु हथियार रखना उत्तर कोरिया का सही फैसला था।
सुप्रीम पीपल्स असेंबली में दिए गए अपने संबोधन में किम ने यूएस पर “राज्य-प्रायोजित आतंकवाद और आक्रामक नीतियों” का आरोप लगाया। उन्होंने साफ कहा कि उत्तर कोरिया ने अमेरिका के दबाव और कूटनीतिक आश्वासनों को ठुकराकर परमाणु हथियार बनाए रखना सही किया।
किम जोंग उन ने यह भी दोहराया कि उनके देश की परमाणु नीति अब “अपरिवर्तनीय” है, यानी इसमें किसी तरह का बदलाव संभव नहीं है।
अमेरिका पर दबाव की रणनीति
किम के बयान से यह संकेत मिलता है कि उनका मानना है कि जिन देशों के पास परमाणु हथियार नहीं होते, वे अमेरिका की सैन्य ताकत के सामने कमजोर पड़ जाते हैं। वहीं, जिन देशों के पास परमाणु क्षमता होती है, वे अमेरिका को चुनौती देने की स्थिति में रहते हैं।
ट्रंप से बातचीत पर शर्त
इस बीच डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में किम से बातचीत दोबारा शुरू करने के संकेत दिए हैं। हालांकि, किम के ताजा बयान से साफ है कि इस बार बातचीत की शर्तें अलग हो सकती हैं। उन्होंने संकेत दिया कि उत्तर कोरिया बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन तभी जब अमेरिका उसे एक परमाणु शक्ति के रूप में स्वीकार करे।
अमेरिका तक पहुंचने का दावा
विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर कोरिया के पास कई परमाणु हथियार मौजूद हैं। उत्तर कोरिया का दावा है कि उसके पास ऐसे मिसाइल सिस्टम हैं जो अमेरिका की मुख्य भूमि तक हमला करने में सक्षम हैं, हालांकि इनकी पूरी तरह पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है।