नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने की कोशिशों के बीच प्रस्तावित दूसरे दौर की शांति वार्ता पर अनिश्चितता गहराती जा रही है। पाकिस्तान के इस्लामाबाद में होने वाली इस बातचीत को लेकर दोनों देशों के रुख अलग-अलग नजर आ रहे हैं।
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्धविराम (सीजफायर) को अनिश्चितकाल तक बढ़ाने का ऐलान कर दिया है। हालांकि, ईरान ने इस फैसले को पूरी तरह एकतरफा बताते हुए खारिज कर दिया है। तेहरान का साफ कहना है कि वह किसी भी बाहरी दबाव में निर्णय नहीं लेगा और अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देगा।
ईरानी संसद स्पीकर के सलाहकार महदी मोहम्मदी ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अमेरिका का यह कदम सिर्फ एक रणनीति हो सकता है। उनके मुताबिक, “हारने वाला पक्ष अपनी शर्तें नहीं थोप सकता। घेराबंदी जारी रखना भी एक तरह की आक्रामक कार्रवाई है, जिसका जवाब दिया जा सकता है।”
गौरतलब है कि दोनों देशों के बीच 8 अप्रैल को 14 दिनों के लिए युद्धविराम लागू किया गया था, जिसकी अवधि 22 अप्रैल को समाप्त होने वाली थी। पहले डोनाल्ड ट्रंप ने इसे आगे न बढ़ाने का संकेत दिया था, लेकिन अब उन्होंने अपना रुख बदलते हुए इसे जारी रखने का फैसला किया है।
ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान के भीतर मतभेद हैं और पाकिस्तान के नेतृत्व—फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफके अनुरोध पर ही यह फैसला लिया गया है। उन्होंने कहा कि जब तक प्रस्तावों पर ठोस प्रगति नहीं होती, तब तक युद्धविराम जारी रहेगा, हालांकि होर्मुज जलडमरूमध्य पर निगरानी और दबाव बनाए रखा जाएगा।
दूसरी ओर, इस्लामाबाद में प्रस्तावित वार्ता को लेकर स्थिति साफ नहीं है। अमेरिका बातचीत के लिए तैयार दिख रहा है और अपना प्रतिनिधिमंडल भेजने की बात कर चुका है, लेकिन ईरान ने फिलहाल इसमें रुचि नहीं दिखाई है। तेहरान का कहना है कि धमकी और दबाव के माहौल में कोई सार्थक बातचीत संभव नहीं है। साथ ही उसने होर्मुज स्ट्रेट से नाकेबंदी हटाने की शर्त भी रखी है।
इस बीच, अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance का इस्लामाबाद दौरा भी फिलहाल टल गया है, जिससे वार्ता की संभावनाओं पर और सवाल खड़े हो गए हैं।