राहुल गांधी ने कांग्रेस के अल्पसंख्यक विभाग की सलाहकार समिति की पहली बैठक में केंद्र सरकार पर बड़ा हमला बोला। दिल्ली में आयोजित बैठक के दौरान राहुल गांधी ने दावा किया कि देश गंभीर आर्थिक संकट की ओर बढ़ रहा है और अगले एक साल में सरकार इस संकट को संभाल नहीं पाएगी। राहुल गांधी ने कहा कि उनकी भविष्यवाणी है कि आर्थिक हालात के कारण सरकार घुटनों पर आ जाएगी। उन्होंने कहा कि देश में विदेशी निवेश लगातार कम हो रहा है और आर्थिक स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। उनके मुताबिक, सरकार के पास इस संकट से निपटने की क्षमता नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि देश में ध्रुवीकरण की राजनीति अब ज्यादा समय तक नहीं चल पाएगी। राहुल गांधी ने दावा किया कि यदि चुनाव “मैनेज” न किए जाएं तो आने वाले समय में सरकार चुनाव हारने लगेगी। बैठक के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि देश की असली लड़ाई अमीर और गरीब के बीच है। उन्होंने कांग्रेस नेताओं से कहा कि पार्टी को समुदायों की राजनीति से ऊपर उठकर गरीबों और कमजोर वर्गों की आवाज बनना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जिस समुदाय या वर्ग पर अत्याचार हो रहा हो, कांग्रेस को खुलकर उसका समर्थन करना चाहिए। राहुल गांधी ने कहा कि अगर महिलाओं, दलितों या मुस्लिम समुदाय के साथ अन्याय हो रहा है तो पार्टी को बिना झिझक उनका नाम लेकर उनकी लड़ाई लड़नी चाहिए।
दरअसल, बैठक में एक नेता ने सुझाव दिया था कि पार्टी को “मुस्लिम” शब्द की जगह “अल्पसंख्यक” शब्द का इस्तेमाल करना चाहिए। इसी पर प्रतिक्रिया देते हुए राहुल गांधी ने यह बात कही। बैठक में इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा कि कांग्रेस को अल्पसंख्यक समुदाय के साथ संवाद और मजबूत करना चाहिए। इस बैठक में अल्पसंख्यक समुदाय के 52 नेता शामिल हुए।
वहीं अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि कांग्रेस को अब अल्पसंख्यक समुदाय के बीच आर्थिक मुद्दों को लेकर भी सक्रिय रूप से चर्चा करनी चाहिए। इसके अलावा इमरान मसूद ने कहा कि कांग्रेस को केवल बीजेपी को हराने के नाम पर वोट नहीं मांगने चाहिए, बल्कि अपनी विचारधारा और नीतियों के आधार पर जनता के बीच जाना चाहिए। गौरतलब है कि राहुल गांधी लगातार सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों से केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाते रहे हैं। हाल ही में उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में भी देश की आर्थिक स्थिति को लेकर सरकार पर निशाना साधा था।