अहमदाबाद में आसाराम के मोटेरा आश्रम से जुड़ी जमीन पर शनिवार को प्रशासन ने बड़ा बुलडोजर अभियान शुरू किया। अहमदाबाद विकास प्राधिकरण (AUDA) की अगुवाई में 45,000 वर्ग मीटर से अधिक जमीन को खाली कराने की कार्रवाई की जा रही है, जिसकी अनुमानित कीमत 500 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है। गुजरात हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद प्रशासन ने यह कदम उठाया है।
कार्रवाई के दौरान भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। आश्रम परिसर और आसपास रहने वाले कुछ लोगों ने विरोध जताने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में रखा। प्रशासन की कार्रवाई के चलते कई लोगों को परिसर खाली करना पड़ा, जिससे स्थानीय स्तर पर नाराजगी भी देखने को मिली।
37 मकानों पर चलेगा बुलडोजर
डीसीपी जोन-2 भरत राठौड़ के अनुसार, चांदखेड़ा क्षेत्र के मोटेरा गांव में स्थित 37 मकानों को हटाने की कार्रवाई की जा रही है। इसके लिए प्रशासन ने चार अलग-अलग टीमें बनाई हैं। प्रत्येक टीम के साथ पुलिस बल की तैनाती की गई है, जिसमें एक पुलिस निरीक्षक (PI), दो उपनिरीक्षक (PSI) और करीब 25 जवान शामिल हैं। रिजर्व पुलिस बल भी मौके पर मौजूद है और पूरी कार्रवाई की निगरानी वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा की जा रही है। प्रशासन का दावा है कि सभी कानूनी प्रक्रियाओं और आवश्यक अनुमतियों का पालन करने के बाद ही यह कार्रवाई शुरू की गई है।
हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत
गुजरात हाईकोर्ट की दो सदस्यीय पीठ ने 16 अप्रैल 2026 को मोटेरा आश्रम ट्रस्ट की याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद राज्य सरकार और प्रशासन के लिए जमीन वापस लेने का रास्ता साफ हो गया। आश्रम ट्रस्ट ने जिला कलेक्टर के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें अतिरिक्त कब्जे वाली जमीन को वापस लेने की बात कही गई थी। यह जमीन अहमदाबाद के प्रमुख खेल परिसर, नरेंद्र मोदी स्टेडियम और सरदार पटेल स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स के निकट स्थित है। प्रशासन का मानना है कि भविष्य में बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों के लिए इस भूमि का उपयोग किया जा सकता है।
क्या है पूरा विवाद?
सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, आश्रम को धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों के लिए करीब 33,980 वर्ग मीटर जमीन आवंटित की गई थी। आरोप है कि समय के साथ आश्रम ने निर्धारित सीमा से कहीं अधिक क्षेत्र पर कब्जा कर लिया। सरकारी दस्तावेजों के मुताबिक, वास्तविक कब्जा लगभग 50,000 वर्ग मीटर तक फैल गया था। इसी कथित अतिक्रमण को लेकर लंबे समय से कानूनी विवाद चल रहा था। मामले की सुनवाई के दौरान प्रशासन ने पुराने भूमि अभिलेख, सर्वे रिकॉर्ड और नक्शों के आधार पर अपना पक्ष रखा। राज्य सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता जी.एच. विर्क ने अदालत में कहा कि पूरी कार्रवाई कानून के दायरे में, पारदर्शी तरीके से और सभी नियमों का पालन करते हुए की जा रही है। हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब प्रशासन ने जमीन को कब्जा मुक्त कराने की प्रक्रिया तेज कर दी है।