पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में 9 जून को बुलाए गए बंद और लॉन्ग मार्च के दौरान कई क्षेत्रों में तनावपूर्ण स्थिति देखने को मिली। रावलकोट, मुजफ्फराबाद, कोटली और पालंदरी समेत विभिन्न इलाकों में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करते नजर आए। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच कई स्थानों पर टकराव की भी खबरें सामने आई हैं।
जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) द्वारा दिए गए बंद और लॉन्ग मार्च के आह्वान के बाद रावलकोट समेत कई शहरों में विरोध प्रदर्शन शुरू हुए। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने प्रमुख सड़कों पर एकत्र होकर अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा बलों की अतिरिक्त तैनाती की गई।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उन्हें रोकने के लिए सुरक्षा बलों ने बल प्रयोग किया, जिसमें फायरिंग और आंसू गैस का इस्तेमाल भी शामिल है। वहीं, विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में हताहतों और घायलों की खबरें सामने आई हैं, हालांकि इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।
बताया जा रहा है कि रावलकोट की कुछ मस्जिदों से भी लोगों से आंदोलन में शामिल होने की अपील की गई। इसके बाद क्षेत्र में विरोध प्रदर्शनों की तीव्रता और बढ़ गई। विवाद की पृष्ठभूमि में 5 जून को PoK प्रशासन द्वारा JAAC को आतंकवाद निरोधी कानून के तहत प्रतिबंधित संगठन घोषित किया जाना प्रमुख कारण माना जा रहा है। इसके बाद संगठन के कई नेताओं को हिरासत में लिया गया, कुछ कार्यालयों को सील किया गया तथा सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। प्रदर्शनकारी नेताओं का दावा है कि क्षेत्र में इंटरनेट और मोबाइल सेवाओं पर भी प्रतिबंध लगाए गए हैं, जिससे संचार व्यवस्था प्रभावित हुई है।
JAAC लंबे समय से महंगाई, बिजली संकट, बेरोजगारी, प्रशासनिक व्यवस्था और क्षेत्रीय राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़े मुद्दों को उठाता रहा है। संगठन ने अपनी विभिन्न मांगों में बिजली और आटे पर सब्सिडी, आर्थिक सुधार, स्थानीय स्वशासन को मजबूत करने तथा विधानसभा में गैर-निवासियों के लिए आरक्षित सीटों का विरोध शामिल किया है।
इस घटनाक्रम पर विदेशों में रह रहे कश्मीरी समुदायों और कुछ अंतरराष्ट्रीय संगठनों की भी प्रतिक्रिया सामने आई है। यूनाइटेड कश्मीर पीपुल्स नेशनल पार्टी (UKPNP) ने घटनाओं की निंदा की है, जबकि ब्रिटेन के कुछ सांसदों ने क्षेत्र में हिंसा और नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की है। फिलहाल क्षेत्र में स्थिति पर प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां नजर बनाए हुए हैं। घटनाओं के संबंध में अलग-अलग पक्षों के दावों की स्वतंत्र पुष्टि और आधिकारिक विवरण का इंतजार किया जा रहा है।