पश्चिम एशिया में जारी तनाव कम होने के बजाय और गहराता नजर आ रहा है। अमेरिका ने बुधवार देर रात भी ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए। यह लगातार 12वीं रात है, जब अमेरिकी सेना ने ईरानी ठिकानों को निशाना बनाया है। इस बीच दोनों देशों के बीच टकराव और तेज होने की आशंका बढ़ गई है। ईरानी सरकारी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिणी ईरान के सिरिक क्षेत्र में देर रात कई तेज धमाकों की आवाजें सुनाई दीं। बताया जा रहा है कि इससे पहले भी अमेरिकी सेना ईरान के विभिन्न सैन्य ठिकानों और रणनीतिक क्षेत्रों पर कार्रवाई कर चुकी है।
अमेरिकी सेना का दावा- अभियान जारी रहेगा
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा कि राष्ट्रपति के निर्देश पर ईरान के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए कार्रवाई की गई है। अमेरिकी सेना का कहना है कि अभियान का उद्देश्य ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना है, जिनसे समुद्री मार्गों और व्यावसायिक जहाजों की सुरक्षा को खतरा बताया जा रहा है।
ट्रंप की चेतावनी के बाद बढ़ी कार्रवाई
इन हमलों से एक दिन पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्त चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी जहाज पर मिसाइल, ड्रोन या किसी अन्य हथियार से हमला किया गया तो अमेरिका जवाबी कार्रवाई में ईरान के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे, जैसे पुलों और बिजली संयंत्रों को निशाना बनाएगा। ट्रंप ने यह भी संकेत दिया था कि आवश्यकता पड़ने पर तेहरान के आसपास स्थित रणनीतिक ठिकानों पर भी कार्रवाई की जा सकती है।
सैन्य ठिकानों पर लगातार हमले
अमेरिकी कार्रवाई के दौरान कथित तौर पर एयरक्राफ्ट हैंगर, ड्रोन भंडारण केंद्र, सैन्य संचालन इकाइयों, लॉजिस्टिक नेटवर्क और समुद्री सैन्य सुविधाओं को निशाना बनाया गया। अमेरिका का दावा है कि इन हमलों का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमता को सीमित करना है।
ईरान की जवाबी कार्रवाई जारी
दूसरी ओर ईरान भी लगातार जवाबी कदम उठा रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, ईरानी सेना ने मिसाइल और ड्रोन हमलों के जरिए जवाब दिया है। हाल ही में होर्मुज जलडमरूमध्य के पास एक तेल टैंकर पर हमले की घटना के बाद क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। बहरीन और कुवैत में भी एहतियात के तौर पर चेतावनी सायरन बजाए गए।
बातचीत के संकेत नहीं
इस बीच राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल ईरान के साथ किसी तरह की वार्ता की संभावना नहीं है। उन्होंने संकेत दिया कि यदि हालात नहीं बदले तो अमेरिका आगे भी ईरान के संवेदनशील और रणनीतिक इलाकों में सैन्य अभियान जारी रख सकता है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर अब दोनों देशों की अगली रणनीति पर टिकी हुई है। लगातार सैन्य कार्रवाई से क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर भी चिंताएं बढ़ गई हैं।