अयोध्या। अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा हेरफेर मामले को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। सोमवार को अयोध्या बार एसोसिएशन की बैठक में बड़ा फैसला लेते हुए कहा गया कि इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों की पैरवी कोई भी वकील नहीं करेगा। बैठक के बाद बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका प्रसाद मिश्रा ने कहा कि यदि कोई अधिवक्ता आरोपियों का पक्ष रखता है तो उस पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा और उसकी सदस्यता भी समाप्त की जा सकती है।
बैठक के दौरान कई अधिवक्ताओं ने ट्रस्ट से जुड़े कुछ पदाधिकारियों पर भी सवाल उठाए। वकीलों ने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जिन लोगों के नाम जांच में सामने आ रहे हैं, उनसे भी पूछताछ की जानी चाहिए। कुछ अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि तीन दिनों के भीतर कार्रवाई नहीं हुई तो बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।
उधर, जांच एजेंसियां भी मामले की तह तक पहुंचने में जुटी हैं। सोमवार को पुलिस ने राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव रहे चंपत राय का बयान दर्ज किया। वहीं, ट्रस्ट से जुड़े अन्य पदाधिकारियों अनिल मिश्रा और गोपाल राव के बयान भी जल्द दर्ज किए जाने की तैयारी है। सूत्रों के मुताबिक इस मामले में करीब 140 लोगों से पूछताछ की जा सकती है।
जांच में अब बैंक कर्मचारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है। पुलिस और एसआईटी को आशंका है कि करोड़ों रुपये के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी बिना अंदरूनी मिलीभगत के संभव नहीं थी। शुरुआती जांच में बैंक से जुड़े दो कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि दानराशि के रिकॉर्ड और जमा प्रक्रिया में किस स्तर पर हेरफेर हुआ।
इस मामले में गिरफ्तार आठों आरोपियों की पुलिस रिमांड सोमवार को समाप्त हो रही है। सभी आरोपियों को अदालत में पेश किया जाएगा। माना जा रहा है कि पुलिस आगे की पूछताछ के लिए दोबारा रिमांड की मांग कर सकती है।
रविवार को पुलिस और एसआईटी की टीमों ने आरोपियों के घरों पर छापेमारी की थी। कार्रवाई के दौरान नकदी, आभूषण और संपत्ति से जुड़े दस्तावेज बरामद किए गए। जांच एजेंसियों का कहना है कि मामले में अभी कई और अहम खुलासे हो सकते हैं।