अयोध्या स्थित श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की सोमवार दोपहर 3 बजे होने वाली बैठक पर सभी की नजरें टिकी हैं। राम मंदिर के दानपात्र से कथित चढ़ावा चोरी के मामले के सामने आने के बाद यह ट्रस्ट की पहली महत्वपूर्ण बैठक है। इसमें ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफों पर फैसला लिया जाएगा। साथ ही ट्रस्ट के नए महासचिव और प्रशासनिक ढांचे में संभावित बदलावों पर भी चर्चा होगी।
महासचिव पद के लिए तीन नाम चर्चा में
सूत्रों के मुताबिक, ट्रस्ट के नए महासचिव के लिए तीन नामों पर प्रमुखता से चर्चा हो रही है।
- बजरंग बागड़ – विश्व हिंदू परिषद (VHP) के महामंत्री, पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट और पूर्व नालको चेयरमैन।
- नीरज दौनेरिया – बजरंग दल के राष्ट्रीय संयोजक और राम मंदिर आंदोलन से लंबे समय से जुड़े रहे।
- कृष्णमोहन – सेवानिवृत्त भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारी और पूर्वी उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के संघ संचालक।
हालांकि, महासचिव पद को लेकर अंतिम निर्णय ट्रस्ट की बैठक में ही लिया जाएगा।
गेस्ट हाउस में होगी बैठक
पहले यह बैठक मणिराम दास छावनी में प्रस्तावित थी, लेकिन सुरक्षा कारणों और मीडिया की भारी मौजूदगी को देखते हुए अब इसे राम मंदिर परिसर स्थित गेस्ट हाउस में आयोजित किया जाएगा।
बैठक की अध्यक्षता ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास करेंगे। अधिकांश ट्रस्टी बैठक में व्यक्तिगत रूप से शामिल होंगे, जबकि वरिष्ठ अधिवक्ता एवं ट्रस्टी के. पारासरण ऑनलाइन माध्यम से जुड़ेंगे। चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा भी बैठक में उपस्थित रहेंगे।
26 जून को दिया था इस्तीफा
दानपात्र से कथित चोरी का मामला सामने आने के बाद चंपत राय ने 26 जून को महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया था। मामले की जांच के दौरान अयोध्या पुलिस उनसे और डॉ. अनिल मिश्रा से पूछताछ भी कर चुकी है।
SIT रिपोर्ट और CEO नियुक्ति पर भी नजर
बैठक में विशेष जांच दल (SIT) की अंतरिम रिपोर्ट भी ट्रस्ट के सामने रखी जाएगी। इसके अलावा ट्रस्ट में मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति के प्रस्ताव पर भी चर्चा होने की संभावना है। यदि CEO की नियुक्ति को मंजूरी मिलती है, तो राम मंदिर से जुड़े कई प्रशासनिक और प्रबंधन संबंधी अधिकार मुख्य कार्यकारी अधिकारी को सौंपे जा सकते हैं। ऐसे में यह बैठक केवल दान विवाद तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि ट्रस्ट की भविष्य की प्रशासनिक व्यवस्था तय करने के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।