
न्यूज़ जर्नलिस्ट अंकित कुमार गोयल
रेटिंग: ★★★★☆ 3.5/5
पारिवारिक कॉमेडी का तड़का और पहचान की गलतफहमी का ये मेल आपको हंसते-हंसते खुश कर देगा। “हमशक्लों का हंगामा” एक ऐसी फिल्म है जो बिना किसी भारी-भरकम प्लॉट के सिर्फ साफ-सुथरी हंसी देती है।
कहानी: जब 2 की जगह 4 हो जाएं
पवन और बंटी दो भाई हैं। सुमन और सीरत उनकी पत्नियां। शांत, सुखी और बिल्कुल नॉर्मल लाइफ। दिक्कत तब शुरू होती है जब उसी शहर में इनके हमशक्ल जुड़वां भाई भी आ जाते हैं। नाम भी वही — पवन और बंटी। चेहरा भी एकदम कॉपी-पेस्ट। बस फर्क है तो कपड़ों का।
अब शुरू होता है असली खेल। मोहल्ले वाला सब्जी वाले से लेकर ऑफिस के बॉस तक सब कंफ्यूज। एक की गलती की सजा दूसरा भुगतता है। और सबसे बड़ा बवाल तब मचता है जब सुमन और सीरत कई बार अपने “पतियों” को जूली और आलिया नाम की लड़कियों के साथ देख लेती हैं। शक गहराता है, घर में टेंशन आती है। तंग आकर दोनों एक जासूस को हायर करती हैं। जासूस जब केस सुलझाता है तो 20 साल पुराने एक पारिवारिक राज से पर्दा उठता है। अंत में सारी गलतफहमियां दूर होती हैं और फिल्म हंसी के साथ एक गर्मजोशी भरे नोट पर खत्म होती है।

फिल्म की खास बातें
1. सिचुएशनल ह्यूमर: पंच नहीं, परिस्थिति हंसाती है। लिफ्ट, मार्केट और शादी वाले सीन सबसे मजेदार हैं।
2. संवाद: “तुम कौन वाले पवन हो?” और “बंटी 1.0 और बंटी 2.0” जैसे डायलॉग तुरंत पसंद आने वाले हैं।
3. फैमिली एंटरटेनर: कोई गाली-गलौज नहीं, कोई डबल मीनिंग नहीं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सबके लिए है।
कहां थोड़ी कमी रही
दूसरे हाफ में फिल्म थोड़ी ढीली पड़ती है। जासूस वाला एंगल और शार्प हो सकता था। 4 में से 2 किरदारों को स्क्रीन पर अलग पहचान बनाने में और मेहनत की जरूरत थी।

एक्टिंग और निर्देशन
चारों मुख्य एक्टर्स ने एक जैसे दिखते हुए भी अलग-अलग अंदाज पकड़ा है, जो आसान नहीं है। दोनों महिला लीड ने पत्नी के शक, गुस्से और फिर सुलह को बहुत नेचुरल दिखाया है। निर्देशक ने फिल्म को सिंपल रखा और उसे बेवजह खींचा नहीं।
कहां देखें

आप इस फिल्म को घर बैठे Hungama, Airtel Xstream, Tata Play Binge, Watcho और Amazon Prime USA & UK पर देख सकते हैं।
निष्कर्ष
अगर आप वीकेंड पर दिमाग को आराम देकर सिर्फ हंसना चाहते हैं, तो “हमशक्लों का हंगामा” आपके लिए है। ये “गलतफहमी वाली कॉमेडी” के फॉर्मूले को फिर से ताजा कर देती है।
