रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने के अमेरिकी प्रस्ताव पर भारत की पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारत इस पूरे घटनाक्रम पर करीब से नजर रख रहा है और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े फैसले केवल राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखकर लिए जाएंगे।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत को अमेरिकी संसद में पेश किए गए प्रस्तावित कानून की पूरी जानकारी है। उन्होंने कहा कि भारत किसी भी बाहरी दबाव में आकर अपने निर्णय नहीं लेता। उनके अनुसार, देश अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए दुनिया के कई देशों से कच्चे तेल का आयात करता है और भविष्य में भी राष्ट्रीय हित सर्वोपरि रहेगा।
अमेरिकी सीनेट में पेश इस विधेयक को 60 से अधिक सीनेटरों का समर्थन मिल चुका है। रिपोर्टों के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी इस प्रस्ताव के पक्ष में हैं। यदि यह बिल कानून का रूप लेता है, तो रूस से तेल खरीदने वाले भारत, चीन, अजरबैजान और हंगरी जैसे देशों के अमेरिका के साथ व्यापार पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाया जा सकता है।
गौरतलब है कि इस विधेयक का प्रारंभिक मसौदा रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम और डेमोक्रेटिक सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने तैयार किया था। शुरुआती ड्राफ्ट में रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 500 फीसदी टैरिफ लगाने का प्रस्ताव था। बाद में 14 जुलाई को पेश किए गए संशोधित संस्करण में टैरिफ की दर घटाकर 100 फीसदी कर दी गई। अब इस बिल पर अमेरिकी संसद की आगे की प्रक्रिया पर दुनिया की नजरें टिकी हैं, क्योंकि इसके लागू होने की स्थिति में वैश्विक ऊर्जा कारोबार और कई देशों के व्यापारिक संबंधों पर व्यापक असर पड़ सकता है।