दिशा सालियान की मौत का मामला करीब छह साल बाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है। मुंबई में साल 2020 में हुई उनकी मौत की अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) नए सिरे से जांच कर रही है। बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बाद जांच एजेंसी ने इस मामले में FIR दर्ज कर अपनी कार्रवाई शुरू कर दी है। सबसे अहम बात यह है कि CBI ने FIR में हत्या, गैंगरेप और आपराधिक साजिश से जुड़ी धाराएं लगाई हैं। इसके साथ ही एजेंसी ने मामले की जांच के लिए DSP पूरन कुमार को विशेष जांच अधिकारी नियुक्त किया है। अब CBI उन परिस्थितियों की पड़ताल करेगी, जिनमें दिशा सालियान की मौत हुई थी।
2020 में हुई थी दिशा सालियान की मौत
दिशा सालियान की मौत 8-9 जून 2020 की दरम्यानी रात मुंबई के मलाड इलाके में एक ऊंची इमारत से गिरने के बाद हुई थी। शुरुआती जांच के दौरान मुंबई पुलिस ने मामले को हादसा या आत्महत्या की दिशा में देखा था और बाद में केस को बंद कर दिया गया था। हालांकि, दिशा के परिवार की ओर से उनकी मौत को लेकर लगातार सवाल उठाए जाते रहे। इसी सिलसिले में उनके पिता सतीश सालियान ने मार्च 2025 में बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने मामले में FIR दर्ज करने और CBI जांच की मांग की थी।
पिता ने लगाए थे गंभीर आरोप
याचिका में सतीश सालियान की ओर से अपनी बेटी की मौत को लेकर गंभीर आशंकाएं जताई गई थीं। उनके वकील ने अदालत के सामने दावा किया था कि दिशा को कुछ प्रभावशाली लोगों से जुड़ी कथित आपत्तिजनक गतिविधियों की जानकारी थी और इसी वजह से उनकी हत्या की गई। याचिकाकर्ता की तरफ से दिशा के साथ गैंगरेप और फिर हत्या किए जाने के आरोप भी लगाए गए थे। हालांकि, ये आरोप याचिकाकर्ता की ओर से लगाए गए हैं और इन्हें अदालत ने इस स्तर पर स्थापित तथ्य के तौर पर स्वीकार नहीं किया है।
हाईकोर्ट ने जांच को लेकर क्या कहा?
बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब मामले की जांच CBI को सौंपी गई है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि जांच के दौरान पर्याप्त सामग्री सामने आने तक किसी व्यक्ति को आरोपी नहीं माना जा सकता। CBI की FIR में गंभीर धाराएं लगाए जाने के बाद अब जांच एजेंसी घटनाक्रम से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल करेगी। एजेंसी यह भी जांच सकती है कि उस रात वास्तव में क्या हुआ था और पहले की जांच में सामने आए तथ्यों में कोई कमी या विरोधाभास तो नहीं था।
DSP पूरन कुमार करेंगे जांच
CBI ने DSP पूरन कुमार को इस मामले का विशेष जांच अधिकारी नियुक्त किया है। अब उनके नेतृत्व में जांच आगे बढ़ेगी। एजेंसी घटनास्थल, उपलब्ध सबूतों, गवाहों और पहले की जांच से जुड़े रिकॉर्ड की भी समीक्षा कर सकती है। करीब छह साल पुराने इस मामले में CBI की एंट्री के बाद एक बार फिर कई सवाल सामने हैं। हालांकि, इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने और ठोस सबूत सामने आने के बाद ही स्पष्ट होंगे।