लखनऊ: समाजवादी पार्टी (SP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कन्नौज से सांसद अखिलेश यादव को अब लोहिया ट्रस्ट की जिम्मेदारी भी मिल गई है। ट्रस्ट की कमान अब तक सपा नेता और अखिलेश के चाचा शिवपाल सिंह यादव के पास थी। बताया जा रहा है कि ट्रस्ट की हालिया बैठक में अखिलेश यादव को अध्यक्ष बनाए जाने के प्रस्ताव पर सभी सदस्यों की सहमति बनी। यह फैसला उत्तर प्रदेश की आगामी विधानसभा चुनाव की सियासत के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है। लोहिया ट्रस्ट लंबे समय से समाजवादी विचारधारा से जुड़े राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है।
सभी सदस्यों की सहमति से हुआ फैसला
सूत्रों के मुताबिक, कुछ दिन पहले लोहिया ट्रस्ट की बैठक हुई थी, जिसमें अध्यक्ष पद को लेकर फैसला लिया गया। ट्रस्ट के सभी 8 सदस्यों ने अखिलेश यादव के नाम पर सहमति जताई। इनमें शिवपाल सिंह यादव भी शामिल बताए जा रहे हैं। इस बदलाव के बाद अखिलेश यादव के पास समाजवादी पार्टी के साथ-साथ उससे जुड़े महत्वपूर्ण संगठनों में भी प्रभाव और मजबूत हुआ है।
2017 से शिवपाल संभाल रहे थे ट्रस्ट की कमान
लोहिया ट्रस्ट की जिम्मेदारी शिवपाल सिंह यादव के पास साल 2017 से थी। उस समय समाजवादी पार्टी और यादव परिवार में राजनीतिक टकराव अपने चरम पर था। 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव ने रामगोपाल यादव को ट्रस्ट से हटाकर शिवपाल सिंह यादव को इसकी जिम्मेदारी सौंपी थी। इसके बाद से लगातार शिवपाल ट्रस्ट के अध्यक्ष पद पर बने हुए थे। अब करीब एक दशक बाद ट्रस्ट की कमान फिर बदली है और अखिलेश यादव को अध्यक्ष बनाया गया है।
BJP ने साधा निशाना, 2017 के विवाद की दिलाई याद
अखिलेश यादव के लोहिया ट्रस्ट का अध्यक्ष बनने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा है। यूपी बीजेपी के प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने इसे लेकर तंज कसा और सपा के अंदर पुराने विवाद की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी में एक बार फिर अंदरूनी खींचतान शुरू होने की संभावना दिखाई दे रही है। बीजेपी प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि डॉ. राम मनोहर लोहिया परिवारवाद के खिलाफ रहे, लेकिन उनके नाम पर बने ट्रस्ट को सपा ने परिवार तक सीमित कर दिया है। राकेश त्रिपाठी ने यह भी कहा कि अखिलेश यादव के हाथ में ट्रस्ट की कमान आने से 2017 के घटनाक्रम की यादें ताजा हो गई हैं।
क्या फिर शुरू होगी चाचा-भतीजे की सियासी चर्चा?
लोहिया ट्रस्ट में हुए इस बदलाव के बाद चाचा-भतीजे के राजनीतिक रिश्तों को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, ट्रस्ट के अध्यक्ष पद में बदलाव पर शिवपाल यादव की सहमति होने की बात सामने आई है। ऐसे में फिलहाल इसे सपा के भीतर किसी नए विवाद से जोड़कर देखना जल्दबाजी होगी। लेकिन उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति में इस फैसले के राजनीतिक मायने जरूर निकाले जा रहे हैं।
सपा की स्थापना से पहले बना था लोहिया ट्रस्ट
लोहिया ट्रस्ट का गठन समाजवादी पार्टी के अस्तित्व में आने से पहले हुआ था। ट्रस्ट का उद्देश्य समाजवादी विचारधारा और डॉ. राम मनोहर लोहिया के विचारों को आगे बढ़ाना रहा है। सपा से जुड़े राजनीतिक हलकों में ट्रस्ट को काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में इसकी कमान अखिलेश यादव के हाथ में आना पार्टी के संगठनात्मक और राजनीतिक लिहाज से बड़ा बदलाव माना जा रहा है। लोहिया ट्रस्ट में बदलाव ऐसे समय हुआ है, जब उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दल अपनी तैयारियों को तेज कर रहे हैं। इसलिए इस फैसले को लेकर यूपी की सियासत में आगे भी चर्चा जारी रहने की संभावना है।