न्यूज़ जर्नलिस्ट अंकित कुमार गोयल
म्यूजिक वीडियो के लिए शादी का सेट तैयार करना आम बात है, लेकिन ‘बन्नो’ के लिए टीम ने सेट बनाने के बजाय एक वास्तविक शादी को ही शूटिंग फ्लोर बना दिया। गुरुग्राम में हुई इस शादी के बीच दूल्हा-दुल्हन, परिवार और रिश्तेदारों की मौजूदगी में गाने की शूटिंग की गई और करीब 6 से 7 घंटे में पूरा गाना शूट कर लिया गया। लोक संगीत की परंपरा को मॉडर्न बीट के साथ पेश करने वाले इस गाने के पीछे इंडिपेंडेंट आर्टिस्ट के रूप में अपनी पहचान बनाने की कोशिश भी है। सिंगिंग के साथ सॉफ्ट स्किल्स और इमेज कंसल्टिंग के क्षेत्र में काम कर रहीं शीतल गुप्ता से ‘बन्नो’ की शूटिंग, संगीत, रिश्तों की कहानी और उनके आने वाले प्रोजेक्ट्स पर अंकित कुमार गोयल ने खास बातचीत की।
किसी फिल्मी सेट के बजाय असली शादी को ‘बन्नो’ का शूटिंग फ्लोर बनाने का आइडिया कैसे आया?
‘बन्नो’ मेरी इंडिपेंडेंट आर्टिस्ट के रूप में आगे बढ़ने की यात्रा का हिस्सा है। इसी दौरान एक मित्र की बेटी की शादी थी। हमें लगा कि इस गाने को शादी के वास्तविक माहौल की जरूरत है। अलग से शादी का सेट तैयार करने के बजाय हमने सोचा कि क्यों न उसी वास्तविक शादी को शूट का हिस्सा बनाया जाए। वहां दूल्हा-दुल्हन की खुशी, माता-पिता की भावनाएं और परिवार का माहौल पहले से मौजूद था। हमने उसी जेन्युइननेस को कैमरे में कैद करने की कोशिश की।
रियल वेडिंग में कैमरा लेकर पहुंचना आसान नहीं होता। परिवार की पहली प्रतिक्रिया क्या थी?
दुल्हन का परिवार मुझे पहले से जानता था और उन्हें मुझ पर विश्वास था। उन्होंने बहुत सहजता से कहा कि आप आइए और जैसे चाहें शूट कीजिए। उनके लिए भी यह अपनी बेटी की शादी में किसी अपने के काम जैसा था। इसलिए हमें शूटिंग के दौरान परिवार का अच्छा सहयोग मिला।
पूरा गाना कितने समय में शूट हो गया?
हमने गुरुग्राम में शूट किया और करीब 6 से 7 घंटे में पूरा गाना शूट कर लिया गया। रियल वेडिंग में हर चीज पहले से तय नहीं होती, इसलिए हमें मौके के हिसाब से काम करना पड़ा। लेकिन उसी वजह से वीडियो में वास्तविक माहौल भी आया।
‘बन्नो’ की सबसे बड़ी खूबी आपके लिए उसका संगीत है या उसका रियल वेडिंग शूट?
मैं दोनों को अलग नहीं करती। गाने की कहानी शादी और लोक परंपरा से जुड़ी है, इसलिए वास्तविक शादी में शूट करना उसके भाव के साथ स्वाभाविक रूप से जुड़ गया। दूल्हा-दुल्हन की खुशी, परिवार और रिश्तेदारों की मौजूदगी ने गाने को एक वास्तविक माहौल दिया।
फोक म्यूजिक को मॉडर्न बीट के साथ पेश करने के पीछे आपकी सोच क्या थी?
भारत का लोक संगीत बहुत समृद्ध है। अलग-अलग क्षेत्रों की अपनी लोक परंपराएं हैं। ‘बन्नो’ भी हमारी शादी की लोक परंपरा से जुड़ा है। हम चाहते थे कि इसकी मूल भावना बनी रहे, लेकिन इसकी प्रस्तुति आज के श्रोताओं से भी जुड़े। इसलिए इसमें मॉडर्न बीट का इस्तेमाल किया गया। हमारा प्रयास लोक संगीत की जड़ों को बनाए रखते हुए उसे नई पीढ़ी तक नए अंदाज में पहुंचाना था।
गीत के बोलों में शादी के बाद बनने वाले रिश्तों की भी झलक है। इस पहलू को कैसे जोड़ा गया?
हम चाहते थे कि गीत सिर्फ शादी के दिन की खुशी तक सीमित न रहे। दुल्हन जब नए घर जाती है तो सास, ससुर, ननद और परिवार के दूसरे रिश्ते उसकी जिंदगी का हिस्सा बनते हैं।
भारतीय लोकगीतों में इन रिश्तों और अनुभवों की झलक लंबे समय से मिलती रही है। इसी सोच से गीत की पंक्तियों का विचार आया—‘ओ रे बन्नो, तेरी सास नख चढ़ी…’ यह एक खूबसूरत लोकगीत है। जिसमें लोकगीत की मिठास के साथ छेड़छाड़ भरा चुलबुला अंदाज़ भी देखने को मिलता है।
सिद्धांत माधव के साथ ‘बन्नो’ तैयार करने का अनुभव कैसा रहा?
हम दोनों के बीच अच्छा तालमेल है और हम एक-दूसरे की सोच को समझते हैं। जब उन्होंने फोक सॉन्ग पर काम करने की बात कही तो मैंने तुरंत हामी भर दी। हमने साथ बैठकर इस पर काम किया। संगीत में मॉडर्न फील दी गई और एक ड्रॉप भी रखा गया, जिससे गाने को अलग ऊर्जा मिलती है। मुझे उनका विजन बहुत पसंद आया।
रियल शादी में शूटिंग के दौरान कोई ऐसा मजेदार पल आया, जो कैमरे के पीछे रह गया?
हां। लिप्सिंग के दौरान हम टेक के लिए जगह खाली होने का इंतजार कर रहे थे। जैसे ही टेक शुरू किया, दूल्हा-दुल्हन के मेकअप से जुड़े लोग वहां आ गए। टेक चल रहा था, इसलिए हम उन्हें कुछ बता भी नहीं सकते थे। वे हमें देख रहे थे और उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि वहां क्या हो रहा है। दूसरी तरफ हमें भी हंसी आ रही थी, लेकिन टेक के दौरान हंस नहीं सकते थे। वह पल काफी मजेदार था। रियल लोकेशन पर शूटिंग में ऐसी चीजें हो जाती हैं।
सिंगिंग के साथ आप सॉफ्ट स्किल्स कोच और इमेज कंसल्टेंट भी हैं। दोनों भूमिकाएं आपके लिए कैसे जुड़ती हैं?
मुझे लगता है कि दोनों क्षेत्र एक-दूसरे से जुड़े हैं। कई प्रतिभाशाली लोग छोटे शहरों से बड़े शहरों में आते हैं। उनमें टैलेंट होता है, लेकिन कई बार वे खुद को सही तरीके से प्रस्तुत नहीं कर पाते। बातचीत, व्यवहार, पहनावा और प्रेजेंटेशन—ये सभी प्रोफेशनल इमेज का हिस्सा हैं। मेरी कोशिश रहती है कि व्यक्ति के टैलेंट के साथ उसकी प्रस्तुति पर भी काम किया जाए।
इंडिपेंडेंट आर्टिस्ट के रूप में अपनी पहचान बनाना आपके लिए कितना अलग अनुभव है?
आज इंडिपेंडेंट कलाकारों के पास अपनी पहचान बनाने के कई अवसर हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म ने कलाकारों को सीधे दर्शकों तक पहुंचने की जगह दी है। मेरे लिए इंडिपेंडेंट आर्टिस्ट होना सिर्फ अपना गाना रिलीज करना नहीं है। अपनी सोच, अपनी पहचान और अपने काम को लगातार लोगों तक पहुंचाना भी इसका हिस्सा है। मैं इसी दिशा में आगे बढ़ रही हूं।
‘बन्नो’ के बाद शीतल गुप्ता को किस नए रूप में देखने-सुनने की तैयारी है?
मैं एक फिल्म के लिए तीन गाने लिख रही हूं। इनमें से एक गाना मैं खुद गा रही हूं। इसके अलावा दो और गानों पर काम किया है। ‘बन्नो’ मेरे लिए भारतीय लोक परंपरा और आज के संगीत के बीच एक जुड़ाव है। इसमें वास्तविक शादी की खुशी, रिश्तों की गर्माहट और मॉडर्न म्यूजिक का फन एक साथ आया है। आगे भी मैं संगीत में नए प्रयोग करना चाहती हूं।





