अमेरिका के मध्यावधि चुनाव में मिशिगन से डेमोक्रेटिक उम्मीदवार अब्दुल अल-सैयद ने जीत दर्ज की है. उन्होंने रिपब्लिकन पार्टी के अपने प्रतिद्वंद्वी माइक रोजर्स को चुनाव में शिकस्त दी. इस जीत के साथ अल-सैयद अमेरिकी सीनेट पहुंचने वाले पहले मुस्लिम सांसद बनेंगे. चुनाव प्रचार के दौरान उन्हें अपने नाम और धार्मिक पहचान को लेकर लगातार निशाना बनाया गया था.
जीत के बाद अल-सैयद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी खुशी जाहिर की. उन्होंने कहा कि मिशिगन की जनता का प्रतिनिधित्व करने के लिए सीनेट पहुंचना उनके लिए बड़े सम्मान की बात है. उन्होंने मतदाताओं और समर्थकों का आभार जताते हुए कहा कि लोगों ने मिलकर उस लक्ष्य को हासिल किया, जिसे कई लोग असंभव मान रहे थे. उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव जीतने के बाद अब उनके सामने असली जिम्मेदारी निभाने का समय है.
जीत के बाद ट्रंप और जेडी वेंस पर साधा निशाना
जीत के बाद समर्थकों को संबोधित करते हुए अल-सैयद ने अपने नाम और धर्म को लेकर की गई टिप्पणियों पर भी जवाब दिया. उन्होंने कहा कि उनकी पहचान का आम लोगों की रोजमर्रा की परेशानियों से कोई लेना-देना नहीं है. पेट्रोल की कीमतों, राशन के खर्च और स्वास्थ्य सेवाओं की दिक्कतों के लिए उन्हें जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता.
उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस पर तंज कसते हुए कहा कि कुछ लोगों को उनका नाम बोलने में परेशानी होती है. ऐसे में जनवरी में शपथ ग्रहण के बाद उन्हें सीनेटर कहकर संबोधित किया जा सकता है. उनके इस बयान को चुनाव प्रचार के दौरान हुए व्यक्तिगत हमलों का जवाब माना जा रहा है.
स्वास्थ्य सेवाओं और महंगाई को बनाया चुनावी मुद्दा
अब्दुल अल-सैयद ने अपने चुनाव अभियान में आम लोगों से जुड़े मुद्दों पर खास जोर दिया था. उनकी प्राथमिकताओं में सभी के लिए सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं, महंगाई पर नियंत्रण और आम परिवारों पर आर्थिक बोझ कम करना शामिल रहा.
इसके अलावा उन्होंने इजरायल को अमेरिकी सैन्य सहायता दिए जाने का भी विरोध किया और इस मदद को बंद करने की मांग उठाई. उनकी जीत को मिशिगन की राजनीति में अहम बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है. अब सबकी नजरें इस बात पर रहेंगी कि सीनेट में पहुंचने के बाद वह अपने चुनावी वादों को किस तरह आगे बढ़ाते हैं.