देवभूमि उत्तराखंड के सिनेमाई इतिहास से एक बहुत बड़ी और गौरवशाली ख़बर सामने आ रही है। पहाड़ की लोक-संस्कृति, समृद्ध विरासत और संघर्ष को पर्दे पर जीवंत करने वाली गढ़वाली फ़िल्म ‘ढोली’ का चयन 72वें राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार के लिए हुआ है। राष्ट्रीय स्तर पर मिली इस ऐतिहासिक उपलब्धि से पूरे उत्तराखंड में खुशी की लहर है।
उत्तराखंड की परंपरा में ढोल-दमौ बजाने वाले ‘ढोली’ समाज का योगदान अतुलनीय रहा है। मांगलिक कार्यों से लेकर धार्मिक अनुष्ठानों तक, इनकी थाप के बिना पहाड़ का कोई भी उत्सव अधूरा माना जाता है। फ़िल्म ‘ढोली’ न सिर्फ इस समाज के संघर्ष और स्वाभिमान की कहानी बयां करती है, बल्कि यह लुप्त होती लोक-कला को सहेजने का एक बेहतरीन सिनेमाई प्रयास भी है।
इस ऐतिहासिक अवसर पर उत्तराखंड फ़िल्म विकास परिषद के नोडल अधिकारी के. एस. चौहान ने फ़िल्म ‘ढोली’ की पूरी टीम और कलाकारों को बधाई देते हुए कहा । “गढ़वाली फ़िल्म ‘ढोली’ का राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए चयनित होना पूरे उत्तराखंड प्रदेश के लिए बेहद गर्व की बात है। इस फ़िल्म के माध्यम से हमारी लोक-संस्कृति और कला को राष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान और मान-सम्मान मिलेगा। निश्चित रूप से इस सम्मान से राज्य के स्थानीय लोक-कलाकारों का मनोबल बढ़ेगा और क्षेत्रीय सिनेमा को एक नई दिशा मिलेगी।”
यह सम्मान सिर्फ एक फ़िल्म का नहीं, बल्कि उत्तराखंड की मिट्टी, भाषा और कला का सम्मान है। ‘ढोली’ फ़िल्म की पूरी टीम और उत्तराखंडवासियों को इस बड़ी सफलता पर बहुत-बहुत बधाई।