नई दिल्ली। टीम इंडिया की टी-20 वर्ल्ड कप जीत के जश्न के बीच एक नया विवाद खड़ा हो गया है। ट्रॉफी के साथ मंदिर जाने को लेकर राजनीतिक बयानबाज़ी शुरू हो गई है। इस पूरे मामले पर भारतीय टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है और खिलाड़ियों की उपलब्धि को कमतर न आंकने की बात कही है।
ट्रॉफी के साथ मंदिर पहुंचे कप्तान
दरअसल 8 मार्च को भारत और न्यूजीलैंड के बीच खेले गए टी-20 वर्ल्ड कप फाइनल में टीम इंडिया ने शानदार जीत दर्ज की। इसके बाद कप्तान सूर्यकुमार यादव ट्रॉफी के साथ अहमदाबाद के हनुमान मंदिर अहमदाबाद पहुंचे। इस दौरान उनके साथ आईसीसी चेयरमैन Jay Shah और टीम के हेड कोच Gautam Gambhir भी मौजूद थे। मंदिर में ट्रॉफी के साथ दर्शन की तस्वीरें सामने आने के बाद इस पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं शुरू हो गईं।
कीर्ति आजाद ने उठाए सवाल
तृणमूल कांग्रेस के सांसद Kirti Azad ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए सवाल उठाया कि ट्रॉफी को केवल मंदिर ही क्यों ले जाया गया। उन्होंने पूछा कि इसे मस्जिद, चर्च या गुरुद्वारे क्यों नहीं ले जाया गया। कीर्ति आजाद ने कहा कि यह ट्रॉफी पूरे देश की है और इसे किसी एक धर्म से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जब Kapil Dev की कप्तानी में भारत ने 1983 Cricket World Cup जीता था, तब टीम में सभी धर्मों के खिलाड़ी थे और ट्रॉफी को पूरे देश की जीत माना गया था।
गौतम गंभीर का पलटवार
सांसद के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए Gautam Gambhir ने कहा कि इस तरह के सवालों का जवाब देना भी बेकार है। उन्होंने कहा कि यह पूरे देश के लिए गर्व का पल है और विश्व कप जीत का जश्न मनाया जाना चाहिए। अगर कोई इस तरह का बयान देता है, तो वह खिलाड़ियों की उपलब्धि को कमतर करने जैसा है। गंभीर ने आगे कहा कि टीम के 15 खिलाड़ियों ने इस जीत के लिए बहुत मेहनत और दबाव झेला है। ऐसे में इस तरह के बयान देना खिलाड़ियों के साथ नाइंसाफी है।
हरभजन सिंह ने भी जताई नाराजगी
पूर्व भारतीय क्रिकेटर और राज्यसभा सांसद Harbhajan Singh ने भी कीर्ति आजाद के बयान पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों का ट्रॉफी को मंदिर ले जाना एक व्यक्तिगत आस्था का मामला है। इसे राजनीति से जोड़ना ठीक नहीं है। हरभजन ने कहा कि कीर्ति आजाद खुद एक पूर्व क्रिकेटर रहे हैं, इसलिए उनसे इस तरह की टिप्पणी की उम्मीद नहीं थी। टीम इंडिया की ऐतिहासिक जीत के बीच शुरू हुआ यह विवाद अब राजनीतिक और खेल जगत में चर्चा का विषय बन गया है।