करवा चौथ का त्योहार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। करवाचौथ का त्योहार पति-पत्नी के मजबूत रिश्ते, प्यार और विश्वास का प्रतीक है। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सलामती के लिए व्रत रखती हैं। वहीं कुंवारी लड़कियां भी अच्छे वर के लिए इस दिन व्रत रखती हैं। इस बार करवा चौथ 10 अक्टूबर को है। उत्तर भारत के लगभग सभी राज्यों में करवा चौथ का त्योहार मनाया जाता है।
आपको बता दें चंद्रमा के दर्शन और व्रत खोलने से पहले कुछ चीजें का खास ध्यान रखना चाहिए। माना जाता है ऐसा नहीं करने पर चंद्रमा नाराज हो जाते हैं और पत्नी को पूजा का फल नहीं मिलता।
करवा चौथ का ये व्रत रखा तो पति के लिए जाता है लेकिन इस दिन घर में पत्नी, मां, सास या अन्य किसी बुजुर्ग का अपमान नहीं करना चाहिए। अगर आप ऐसा करती है तो आपका व्रत पूरा नहीं माना जाता है। इस व्रत में बड़े-बुजुर्गों के आशीर्वाद लेना बहुत जरूरी होता है।
इस दिन मां गौरी की पूजा करके उन्हें हलवा-पूरी का भोग लगाने के बाद अपनी सास को ये प्रसाद देना कभी न भूलें।
करवाचौथ के दिन में हर महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि इस दिन सफेद या काला रंग न पहनें। सुहागिन महिलाओं के लिए ये रंग पूरी तरह से अशुभ माना जाता है। इस दिन जहां तक हो सके लाल या पीला रंग का ही कपड़ा पहने।
सुहागिन महिलाएं इस दिन किसी को भी दूध, दही, चावल कोई भी सफेद कपड़ा या अन्य सफेद वस्तु न दें। ऐसा माना जाता है कि अगर कोई भी विवाहित महिला इन चीजों का दान करती है तो चंद्रमा नाराज हो जाते हैं और अशुभ फल देते हैं।