ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। राजनयिक सूत्रों के अनुसार, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अंतिम संस्कार समारोह में शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण भेजा है। इस अवसर पर दुनिया भर के कई प्रमुख नेताओं और प्रतिनिधिमंडलों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। अयातुल्ला अली खामेनेई, जिन्होंने लगभग 36 वर्षों तक ईरान के सर्वोच्च नेता के रूप में जिम्मेदारी निभाई, का निधन इस वर्ष फरवरी में हुआ था। उनके सम्मान में आयोजित अंतिम संस्कार कार्यक्रम 5 जुलाई से शुरू होंगे और कई दिनों तक चलेंगे।
ईरानी मीडिया और आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, 7 जुलाई को तेहरान के दक्षिण में स्थित पवित्र शहर क़ोम में विशेष शोक सभाओं और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाएगा। इसके बाद 9 जुलाई को खामेनेई के पार्थिव शरीर को उनके गृहनगर और ईरान के प्रमुख धार्मिक केंद्र मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।
बताया जा रहा है कि अंतिम संस्कार कार्यक्रम में भारी जनसैलाब उमड़ सकता है। तेहरान, क़ोम और मशहद में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में करोड़ों लोगों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। यदि अनुमानित संख्या सही साबित होती है, तो यह ईरान के इतिहास के सबसे बड़े सार्वजनिक अंतिम संस्कारों में से एक हो सकता है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस कार्यक्रम को लेकर विशेष रुचि देखी जा रही है। कई देशों के शीर्ष नेता और प्रतिनिधि इसमें शामिल हो सकते हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ समेत कई विदेशी गणमान्य व्यक्तियों की मौजूदगी की भी संभावना जताई जा रही है। अयातुल्ला खामेनेई के निधन के बाद ईरान में नेतृत्व परिवर्तन हुआ और उनके पुत्र मोजतबा हुसैनी खामेनेई ने सर्वोच्च नेता की जिम्मेदारी संभाली। हालांकि उनकी सेहत और सार्वजनिक गतिविधियों को लेकर विभिन्न स्तरों पर चर्चाएं जारी हैं।
इस बीच, पश्चिम एशिया में लंबे समय तक चले तनाव और संघर्ष के बाद क्षेत्रीय परिस्थितियों में बदलाव देखने को मिला है। ईरान और अमेरिका के बीच संवाद की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है और दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच स्विट्जरलैंड में उच्च स्तरीय वार्ता जारी है। विश्लेषकों का मानना है कि यह कूटनीतिक प्रयास क्षेत्र में स्थिरता और शांति बहाली की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।