BRICS शिखर सम्मेलन के लिए ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान की नई दिल्ली यात्रा से पहले तेहरान ने भारत के साथ अपने संबंधों को लेकर अहम बयान दिया है। ईरान ने भारत के साथ रिश्तों को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए कहा है कि दोनों देशों के संबंध केवल कूटनीतिक स्तर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनकी जड़ें इतिहास, संस्कृति और सभ्यता में गहरी हैं।ईरान ने यह भी संकेत दिया है कि वह इन मजबूत रिश्तों को व्यापार और आर्थिक सहयोग के विस्तार के लिए इस्तेमाल करना चाहता है। तेहरान के मुताबिक, भारत के साथ आपसी हित से जुड़े कई मुद्दों पर लगातार बातचीत जारी है।
ईरान ने भारत को बताया अहम साझेदार
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाकेई ने कहा कि तेहरान भारत के साथ अपने संबंधों को काफी महत्व देता है। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच कई क्षेत्रों में सहयोग है और आपसी हित से जुड़े विषयों पर बातचीत आगे बढ़ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान की 31 अगस्त को बिश्केक में हुई मुलाकात का जिक्र करते हुए बाकेई ने कहा कि भारत ईरान के लिए महत्वपूर्ण साझेदारों में शामिल है। उन्होंने कहा कि भारत SCO और BRICS दोनों का सदस्य है और उसके साथ आर्थिक तथा व्यापारिक सहयोग को आगे बढ़ाने की संभावनाएं हैं। बाकेई ने भारत और ईरान के रिश्तों को लेकर कहा कि दोनों देशों के संबंध पुराने, ऐतिहासिक और सभ्यतागत आधार पर टिके हुए हैं। उनके मुताबिक, तेहरान इन संबंधों को मौजूदा दौर में भी विशेष महत्व देता है।
BRICS में चाबहार और आर्थिक सहयोग पर हो सकती है चर्चा
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान की नई दिल्ली यात्रा को भारत-ईरान के बीच उच्चस्तरीय संपर्क के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार, आर्थिक सहयोग और आपसी हित से जुड़े मुद्दों पर बातचीत आगे बढ़ सकती है। इनमें चाबहार पोर्ट भी अहम विषय हो सकता है। भारत और ईरान के बीच यह परियोजना लंबे समय से आर्थिक और रणनीतिक सहयोग का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने भी कहा कि दोनों देशों के बीच होने वाली बातचीत में चाबहार सहित कई मुद्दे शामिल रहते हैं।
पेजेशकियान की यात्रा से पहले ईरान की ओर से आए बयान से संकेत मिलता है कि तेहरान भारत के साथ अपने पारंपरिक रिश्तों को आर्थिक सहयोग के नए अवसरों से जोड़ना चाहता है। BRICS जैसे बहुपक्षीय मंच को भी दोनों देशों के बीच संवाद और सहयोग बढ़ाने के एक अहम माध्यम के तौर पर देखा जा रहा है।