इस्लामाबाद। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच घोषित दो सप्ताह के युद्धविराम के दौरान आज इस्लामाबाद में अहम वार्ता होने जा रही है। इस बातचीत में अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधि शामिल होंगे, जबकि पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका में है।
हालांकि, वार्ता शुरू होने से पहले ही इजरायल ने पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी देते हुए उसकी तटस्थता पर सवाल उठा दिए हैं। यह विवाद पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के एक बयान के बाद शुरू हुआ।
इजरायल की कड़ी प्रतिक्रिया
इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय की ओर से जारी बयान में ख्वाजा आसिफ के कथित बयान की निंदा की गई। बयान में कहा गया कि “इजरायल के विनाश की बात करना निंदनीय है” और ऐसी भाषा किसी भी सरकार के लिए स्वीकार्य नहीं हो सकती, खासकर उस देश के लिए जो खुद को शांति वार्ता में तटस्थ मध्यस्थ बताता है।
क्या था विवादित बयान?
दरअसल, ख्वाजा आसिफ ने सोशल मीडिया पर इजरायल को “मानवता के लिए अभिशाप” बताया था और उस पर लेबनान, गाजा और ईरान में निर्दोष लोगों पर हमले करने के आरोप लगाए थे। उनके इस बयान ने कूटनीतिक माहौल को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया है।
युद्धविराम पर बढ़ा संकट
इस बयान के बाद इस्लामाबाद में प्रस्तावित वार्ता और दो सप्ताह के युद्धविराम पर भी असर पड़ता दिख रहा है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने पहले दावा किया था कि लेबनान भी शांति समझौते का हिस्सा है, लेकिन इस दावे को डोनाल्ड ट्रंप और नेतन्याहू दोनों ने खारिज कर दिया था।
लेबनान पर इजरायल का रुख
इस बीच, नेतन्याहू ने साफ कर दिया है कि लेबनान में किसी तरह का युद्धविराम लागू नहीं है। उन्होंने कहा कि हिज्बुल्लाह के खिलाफ सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी और जब तक देश की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो जाती, तब तक ऑपरेशन नहीं रोका जाएगा।
इस पूरे घटनाक्रम ने क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया है और अब सभी की नजरें इस्लामाबाद में होने वाली वार्ता पर टिकी हैं, जिससे यह तय होगा कि युद्धविराम टिकेगा या हालात फिर से बिगड़ेंगे।