दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है। इस बीच संगठन ने केंद्र सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि छात्रों की मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
CJP के प्रतिनिधि आशुतोष रांका ने कहा कि 20 जुलाई को आयोजित ‘संसद चलो’ मार्च केवल एक शुरुआत थी। उनका दावा है कि यदि सरकार ने बातचीत का रास्ता नहीं अपनाया, तो आने वाले दिनों में देशभर से बड़ी संख्या में छात्र और युवा दिल्ली पहुंच सकते हैं।
‘प्रदर्शन शांतिपूर्ण था, पुलिस कार्रवाई के बाद बिगड़े हालात’
आशुतोष रांका ने प्रदर्शन के दौरान हिंसा के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण था। उनके अनुसार, पुलिस द्वारा बल प्रयोग किए जाने के बाद ही स्थिति तनावपूर्ण हुई। उन्होंने मांग की कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों पर पुनर्विचार किया जाए और भविष्य में छात्रों के खिलाफ कार्रवाई न हो। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों, जिनमें सत्तारूढ़ दल भी शामिल है, से छात्रों के मुद्दे पर राजनीति से ऊपर उठकर समर्थन देने की अपील की।
संसद के बाहर विपक्ष का प्रदर्शन
NEET विवाद को लेकर विपक्ष भी सरकार पर लगातार हमलावर है। विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाते हुए विरोध प्रदर्शन की तैयारी की। विपक्ष का आरोप है कि परीक्षा प्रणाली में लगातार सामने आ रही गड़बड़ियों पर सरकार जवाबदेही तय करने में विफल रही है।
विदेशों में भी दिखा समर्थन
NEET विवाद अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बनता दिखाई दे रहा है। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के समर्थन में अमेरिका के न्यूयॉर्क और सैन होजे में प्रदर्शन आयोजित किए गए। प्रदर्शनकारियों ने भारतीय छात्रों के लिए पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग उठाई।
इसी तरह लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग और आयरलैंड के डबलिन में भारतीय दूतावास के बाहर भी प्रदर्शन किए गए, जहां छात्रों के अधिकारों और निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली की मांग को लेकर आवाज उठाई गई।
CJP प्रवक्ता का दावा- व्हाट्सएप अकाउंट हुआ ब्लॉक
इस बीच CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने दावा किया कि उनका व्हाट्सएप अकाउंट ब्लॉक कर दिया गया है। उनका कहना है कि आंदोलन से जुड़े संचार को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, 20 जुलाई के ‘संसद चलो’ मार्च के बाद हिरासत में लिए गए समर्थकों की रिहाई के बाद संगठन ने दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर प्रस्तावित धरना फिलहाल वापस लेने का फैसला किया है। इसके बावजूद जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन जारी है और संगठन ने संकेत दिए हैं कि मांगें पूरी नहीं होने तक आंदोलन समाप्त नहीं होगा।