केंद्र सरकार ने ग्रामीण रोजगार को मज़बूती देने और आर्थिक आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MNREGA) का नाम बदलने के प्रस्ताव को मंज़ूरी दे दी है। दुनिया की सबसे बड़ी रोजगार गारंटी योजनाओं में से एक यह योजना 2005 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सरकार द्वारा शुरू की गई थी।
पहले इसका नाम ‘नेशनल रूरल एम्प्लॉयमेंट गारंटी एक्ट’ था, जिसे बाद में बदलकर ‘महात्मा गांधी नेशनल रूरल एम्प्लॉयमेंट गारंटी एक्ट’ किया गया। अब मोदी सरकार ने इसे नया नाम ‘पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना’ देने का निर्णय लिया है। इस नाम में ‘पूज्य बापू’ शब्द महात्मा गांधी को समर्पित है, जिनकी विचारधारा में ग्रामीण विकास और स्वावलंबन प्रमुख रहे हैं। इस योजना के तहत वित्त वर्ष में 100 दिन की रोजगार गारंटी दी जाती थी, जिसे अब बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है। अनुमान है कि इस बदलाव से ग्रामीण श्रमिकों की वार्षिक आय में लगभग 25% की वृद्धि हो सकती है।
2005 में लागू हुई यह योजना ग्रामीण गरीबी कम करने और बेरोजगार परिवारों को आय का स्थायी साधन उपलब्ध कराने में मील का पत्थर साबित हुई है। सड़क निर्माण, जल संरक्षण, तालाबों की मरम्मत जैसे कार्यों में लाखों लोगों को रोजगार मिला। कोविड-19 महामारी के दौरान इस योजना ने प्रवासी श्रमिकों को घर लौटने के बाद तत्काल काम उपलब्ध कराकर राहत देने में अहम भूमिका निभाई। नए नाम और बढ़ी हुई रोजगार अवधि के साथ सरकार उम्मीद कर रही है कि यह योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को और अधिक मज़बूत बनाएगी।