अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी तनावपूर्ण हालात के बीच भारत की कूटनीतिक कोशिशों का असर दिखाई देने लगा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर की ईरान के शीर्ष नेतृत्व से हुई बातचीत के बाद भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है।
बताया जा रहा है कि भारत का एक टैंकर सुरक्षित रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजर गया है। वहीं कर्नाटक के कारवार बंदरगाह से भी अच्छी खबर आई है, जहां मालवाहक जहाज ‘चेंग एक्स’ सुरक्षित रूप से तट पर पहुंच गया है।
यूएई से रवाना हुआ था जहाज
मिडिल ईस्ट में चल रहे संकट के बीच ‘चेंग एक्स’ नाम का मालवाहक जहाज संयुक्त अरब अमीरात के खोर फक्कन बंदरगाह से 3,100 टन बिटुमेन (तारकोल) लेकर भारत के लिए रवाना हुआ था। यह जहाज 3 मार्च को खोर फक्कन से निकला था और लगभग दो सप्ताह की समुद्री यात्रा के बाद कर्नाटक के कारवार बंदरगाह पर सुरक्षित पहुंच गया।
बंदरगाह अधिकारियों के अनुसार, जहाज करीब 3,100 मीट्रिक टन सामग्री लेकर आया है। मौजूदा क्षेत्रीय तनाव और ईरान की ओर से लगाए गए व्यापारिक प्रतिबंधों के बावजूद जहाज ने कठिन समुद्री मार्ग पार कर भारत पहुंचने में सफलता हासिल की।
संघर्ष के कारण घटे जहाजों की संख्या
आमतौर पर कारवार बंदरगाह पर हर महीने 5 से 8 बिटुमेन ले जाने वाले जहाज खाड़ी देशों से पहुंचते हैं। लेकिन मौजूदा मिडिल ईस्ट संकट के चलते इन जहाजों की आवाजाही में काफी कमी आ गई है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास फंसे हैं भारत के 27 टैंकर
जानकारी के मुताबिक इस समय स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास भारत के कुल 27 टैंकर फंसे हुए हैं। ऐसे में यदि ईरान के साथ किसी तरह का समझौता हो जाता है तो यह भारत के लिए बड़ी कूटनीतिक सफलता मानी जाएगी।
अगर भारतीय जहाजों को इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से सुरक्षित गुजरने की गारंटी मिलती है तो इससे कई फायदे होंगे। सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति पर बना संकट खत्म हो जाएगा। इसके अलावा इस इलाके में फंसे करीब 23 हजार भारतीय नाविकों की सुरक्षित वापसी भी संभव हो सकेगी।