नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के चौथे दिन गुरुवार को संसद भवन परिसर में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक टकराव देखने को मिला। भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के सांसदों ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के प्रधानमंत्री आवास के निकट हुए धरने के विरोध में प्रदर्शन किया, जबकि विपक्षी दलों ने NEET पेपर लीक मामले और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जोरदार नारेबाजी की।
संसद परिसर में दोनों पक्षों के सांसद आमने-सामने आ गए, जिससे कुछ समय के लिए माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया। सत्ता पक्ष और विपक्ष ने एक-दूसरे के खिलाफ जमकर नारे लगाए और अपने-अपने रुख को लेकर प्रदर्शन किया।
NEET और छात्र आंदोलन पर हंगामे के आसार
संसद के भीतर भी NEET परीक्षा से जुड़े कथित पेपर लीक, छात्रों के आंदोलन और CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) के प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर हंगामे की संभावना बनी हुई है। विपक्ष लगातार इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है, जबकि सरकार चर्चा के लिए अपनी सहमति जता चुकी है।
सरकार बोली- चर्चा के लिए तैयार हैं
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने दोहराया कि सरकार NEET पेपर लीक के मुद्दे पर सदन में विस्तृत चर्चा कराने के पक्ष में है। उन्होंने कहा कि सरकार पहले दिन से ही चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन यह तय होना जरूरी है कि बहस किस नियम के तहत और कितनी अवधि के लिए होगी। रिजिजू ने कहा कि सरकार चाहती है कि युवाओं के भविष्य से जुड़े इस संवेदनशील विषय पर सदन में रचनात्मक और सार्थक चर्चा हो, ताकि समाधान की दिशा में आगे बढ़ा जा सके।
विपक्ष की शर्त- पहले इस्तीफा
दूसरी ओर विपक्ष अपने रुख पर कायम है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने स्पष्ट किया कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा नहीं देते, तब तक विपक्ष NEET पेपर लीक के मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार नहीं होगा। इसी मुद्दे को लेकर विपक्षी सांसद संसद परिसर में लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और सरकार पर जवाबदेही तय करने का दबाव बना रहे हैं।
गतिरोध बरकरार
सत्ता पक्ष चर्चा शुरू कराने की बात कर रहा है, जबकि विपक्ष मंत्री के इस्तीफे की मांग पर अड़ा हुआ है। ऐसे में NEET विवाद को लेकर संसद में जारी गतिरोध फिलहाल खत्म होता नजर नहीं आ रहा। अब सभी की नजर इस बात पर है कि दोनों पक्ष बातचीत के जरिए किसी सहमति पर पहुंचते हैं या आने वाले दिनों में संसद की कार्यवाही फिर हंगामे की भेंट चढ़ती है।