कोलकाता। 2024 लोकसभा चुनाव से पहले I.N.D.I. गठबंधन में सीट शेयरिंग को लेकर उठापटक चल रही है। कुछ दिनों में भारत जोड़ो न्याय यात्रा पश्चिम बंगाल पहुंचने वाली है।
राहुल गांधी की कोशिश है कि उनके कार्यक्रम में सीएम ममता बनर्जी शिरकत करें, लेकिन सीएम ममता फिलहाल सीट शेयरिंग को लेकर कांग्रेस के साथ कोई समझौता करने के मूड में नहीं दिख रहीं हैं। बंगाल में 42 लोकसभा सीटें हैं। राज्य में कांग्रेस 8 से 14 सीटों पर चुनाव चाहती है। वहीं ममता बनर्जी ने संकेत दिए हैं कि वो दो से ज्यादा सीटें कांग्रेस को नहीं देने वाली।
अपने दम पर चुनाव लड़ना जानती है कांग्रेस
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के इस तेवर को देखकर कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने ममता बनर्जी को ‘अवसरवादी’ करार देते हुए उनपर निशाना साधा। चौधरी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी अपने दम पर चुनाव लड़ना जानती है। 2011 के चुनाव में ममता बनर्जी कांग्रेस की कृपा से सत्ता में आई थीं।
‘2011 में टीएमसी कांग्रेस की दया से सत्ता में आई थी’
कांग्रेस सांसद ने एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा,”इस बार चुनाव ममता बनर्जी की दया पर नहीं लड़ा जाएगा। ममता बनर्जी जो दो सीटें छोड़ रही हैं, उन पर कांग्रेस ने बीजेपी और टीएमसी को हराया है। कांग्रेस पार्टी जानती है कि चुनाव कैसे लड़ना है। ममता बनर्जी अवसरवादी हैं; वह कांग्रेस की दया से 2011 में सत्ता में आईं।”
अधीर रंजन ने आगे कहा कि पार्टी जानती है कि चुनाव कैसे लड़ना है और किस तरह जीतना है। कांग्रेस के साथ सीट बंटवारे पर TMC के राज्य महासचिव कुणाल घोष के उस बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। उन्होंने कहा था कि टीएमसी राज्य की सभी 42 लोकसभा सीटों पर लड़ेगी
सीट शेयरिंग को लेकर राहुल गांधी ने क्या कहा
इससे पहले बुधवार को भारत जोड़ो न्याय यात्रा से मीडिया को संबोधित करते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि लोकसभा चुनाव के लिए बंगाल में सीट बंटवारे पर तृणमूल कांग्रेस के साथ बातचीत चल रही है।
राहुल गांधी ने कहा,”सीट-बंटवारे पर बातचीत चल रही है; मैं यहां टिप्पणी नहीं करना चाहता। लेकिन ममता बनर्जी मेरी और हमारी पार्टी की बहुत करीबी हैं। कभी-कभी हमारे नेता कुछ कहते हैं, उनके नेता कुछ कहते हैं, और यह चलता रहता है। यह स्वाभाविक बात है। ऐसी टिप्पणियों से कोई फर्क नहीं पड़ेगा।”
बता दें कि कांग्रेस चाहती है कि राहुल गांधी की अगुवाई वाली भारत जोड़ो न्याय यात्रा के उप्र में आने से पहले सीट-बंटवारे का समझौता हो जाए।