राज्यसभा चुनाव के लिए सोमवार, 16 मार्च को मतदान जारी है। बिहार की पांच सीटों के लिए हो रही वोटिंग में एनडीए और महागठबंधन के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है। एनडीए जहां चार सीटों पर मजबूत स्थिति में दिखाई दे रहा है, वहीं पांचवीं सीट को लेकर सस्पेंस बरकरार है। दोनों खेमों के नेता अपनी-अपनी जीत का दावा कर रहे हैं।
मतदान के बीच महागठबंधन के लिए चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। कांग्रेस के दो विधायक—फारबिसगंज से मनोज विश्वास और वाल्मीकिनगर से सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा—अब तक वोटिंग प्रक्रिया में शामिल नहीं हुए हैं और उनसे संपर्क भी नहीं हो पा रहा है। दोनों के मोबाइल फोन स्विच ऑफ बताए जा रहे हैं, जिससे बिहार के सियासी गलियारों में क्रॉस वोटिंग को लेकर हलचल तेज हो गई है।
विधानसभा परिसर में जारी मतदान के दौरान अब तक एनडीए के 176 और महागठबंधन के 37 विधायकों ने अपने वोट डाल दिए हैं। आरजेडी के 24 विधायक वोटिंग कर चुके हैं, जबकि पार्टी के एक विधायक फैसल रहमान से भी संपर्क नहीं हो पा रहा है। कांग्रेस के तीन विधायक अभी तक वोट डालने नहीं पहुंचे हैं, जिनमें से दो विधायक सुरेंद्र कुशवाहा और मनोज विश्वास से रविवार से ही संपर्क नहीं हो सका है।
महागठबंधन के नेताओं का कहना है कि वे जल्द ही अपने विधायकों से संपर्क कर लेंगे, लेकिन अभी तक उनसे किसी की बातचीत नहीं हो पाई है। इस घटनाक्रम के बाद सियासी हलकों में यह सवाल उठने लगा है कि क्या होटल पॉलिटिक्स के बावजूद महागठबंधन में कोई खेल हो गया है।
दरअसल, वोटिंग से पहले रविवार देर रात महागठबंधन ने अपने सभी विधायकों को पटना के आर ब्लॉक स्थित होटल पलाश कौटिल्य में ठहराया था। यहां से विधायकों को सीधे बिहार विधानसभा पहुंचकर मतदान करना था। देर रात नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव भी होटल पहुंचे और करीब एक घंटे तक विधायकों के साथ चुनाव को लेकर चर्चा की। क्रॉस वोटिंग की आशंका को देखते हुए ही विधायकों को होटल में रखा गया था, लेकिन इसके बावजूद कुछ विधायकों से संपर्क नहीं हो पाने से महागठबंधन की चिंता बढ़ गई है।
पांचवीं सीट को लेकर मुकाबला और भी दिलचस्प हो गया है। आरजेडी ने अमरेंद्र धारी सिंह को मैदान में उतारकर चुनाव को रोचक बना दिया है। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी के पांच विधायकों ने पहले ही आरजेडी को समर्थन देने का ऐलान किया है, जबकि बसपा का भी महागठबंधन को समर्थन बताया जा रहा है। ऐसे में शुरुआत में महागठबंधन की स्थिति मजबूत मानी जा रही थी, लेकिन मतदान के दौरान बदलते घटनाक्रम ने मुकाबले को और रोमांचक बना दिया है। अब सभी की नजर नतीजों पर टिकी है।