नई दिल्ली। पेपर लीक के मामलों पर सख्त कार्रवाई की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शुक्रवार को सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) कानून में संशोधन से जुड़े प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। प्रस्तावित बदलावों के तहत पेपर लीक और संगठित परीक्षा घोटालों में शामिल लोगों के लिए सजा और आर्थिक दंड दोनों को पहले से अधिक कठोर बनाने की तैयारी की गई है।
10 साल तक जेल और भारी जुर्माने का प्रस्ताव
सूत्रों के अनुसार, संशोधित विधेयक में पेपर लीक से जुड़े गंभीर मामलों में दोषियों को अधिकतम 10 वर्ष तक की सजा और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान शामिल किया गया है। सरकार का उद्देश्य ऐसे अपराधों पर प्रभावी रोक लगाना और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।
मौजूदा कानून में क्या है प्रावधान?
वर्तमान कानून के तहत पेपर लीक के दोषियों को 3 से 5 वर्ष तक की सजा और आर्थिक दंड का प्रावधान है। वहीं, यदि किसी सेवा प्रदाता की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है या वह अपराध की जानकारी छिपाता है, तो उसके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। प्रस्तावित संशोधन में इन प्रावधानों को और मजबूत किए जाने की बात सामने आई है।
सरकारी सूत्रों का कहना है कि कैबिनेट की मंजूरी के बाद इस विधेयक को संसद के आगामी सत्र में लोकसभा में पेश किया जा सकता है।
सरकार और CJP के बीच हुई बातचीत
इधर, पेपर लीक के मुद्दे पर आंदोलन कर रही Cockroach Janta Party (CJP) के प्रतिनिधियों और केंद्र सरकार के बीच शुक्रवार को दिल्ली के संविधान क्लब में बैठक हुई। बैठक में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने सरकार का पक्ष रखा, जबकि CJP की ओर से प्रतिनिधिमंडल ने अपनी मांगें सामने रखीं।
बैठक के बाद पार्टी के प्रवक्ताओं ने दावा किया कि उन्होंने सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखीं। उनका कहना था कि यदि केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे समेत प्रमुख मांगों पर निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
दो मांगों पर सकारात्मक संकेत का दावा
बैठक के बाद CJP की ओर से यह दावा किया गया कि सरकार ने उनकी कुछ मांगों पर सकारात्मक रुख दिखाया है। पार्टी के अनुसार, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई न करने और पेपर लीक से प्रभावित परिवारों को मुआवजे के मुद्दे पर सरकार ने सहमति के संकेत दिए हैं। हालांकि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।
संविधान क्लब में बनी सहमति
बैठक के स्थान को लेकर भी दोनों पक्षों के बीच पहले असहमति थी। CJP ने किसी मंत्री के कार्यालय या सरकारी आवास पर बातचीत से इनकार करते हुए सार्वजनिक स्थान पर बैठक की मांग की थी। इसके बाद दोनों पक्ष संविधान क्लब में वार्ता के लिए सहमत हुए, जहां कई मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई।