नारी शक्ति वंदन अधिनियम से जुड़े संशोधन बिल को लेकर संसद के बाद अब सियासी लड़ाई सड़क पर पहुंचने वाली है। लोकसभा में मोदी सरकार 131वां संशोधन बिल पारित कराने में सफल नहीं हो सकी। बिल के पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े, जबकि इसे पास करने के लिए दो-तिहाई यानी 352 वोटों की जरूरत थी।
लोकसभा में बिल के गिरने के बाद बीजेपी ने देशभर में आंदोलन छेड़ने का ऐलान किया है। पार्टी अब महिला आरक्षण के मुद्दे पर विपक्ष को घेरते हुए इसे राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की तैयारी में है। सरकार ने इस बिल समेत महिला आरक्षण से जुड़े तीन प्रस्तावों के लिए संसद का तीन दिवसीय विशेष सत्र बुलाया था। यदि यह बिल पास हो जाता, तो लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण मिलता।
हालांकि, परिसीमन के मुद्दे को लेकर विपक्ष ने कड़ा विरोध जताया, जो इस बिल के अटकने की मुख्य वजह बना। अब बीजेपी इस मुद्दे को लेकर देशभर में प्रदर्शन, प्रेस कॉन्फ्रेंस और सोशल मीडिया अभियान चलाएगी। 18 अप्रैल से विभिन्न राज्यों में विरोध कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें एनडीए के सहयोगी दल भी शामिल होंगे।
संसद में एनडीए फ्लोर लीडर्स की बैठक में यह तय किया गया कि जिन विपक्षी सांसदों ने बिल का विरोध किया, उनके संसदीय क्षेत्रों में जाकर विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे। साथ ही पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के आगामी चुनावों में भी इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाने की रणनीति बनाई गई है। पार्टी इसे 2029 तक आरक्षण लागू करने का एक खोया हुआ अवसर बताकर प्रचारित करेगी।
बिल पास न होने के बाद एनडीए की महिला सांसदों ने संसद परिसर में धरना दिया और विपक्ष के खिलाफ नारेबाजी की। इस मुद्दे पर Amit Shah ने विपक्ष पर 70 करोड़ महिलाओं को धोखा देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि महिलाओं का विश्वास खोने के बाद विपक्ष जश्न कैसे मना सकता है। वहीं बीजेपी नेताओं ने Rahul Gandhi और विपक्षी गठबंधन पर महिलाओं के साथ विश्वासघात का आरोप लगाया और कहा कि महिला आरक्षण के मुद्दे पर विपक्ष का असली चेहरा सामने आ गया है।