जालना जिले में टमाटर उत्पादक किसान इन दिनों भारी आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। उचित दाम नहीं मिलने से नाराज एक किसान ने अपनी पूरी फसल सड़क पर फेंककर विरोध जताया। यह मामला धारकल्याण गांव का है, जहां किसान अमर काकड़े ने करीब एक एकड़ में टमाटर की खेती की थी, जिस पर लगभग 40 से 45 हजार रुपये का खर्च आया था।
अनुकूल मौसम के चलते इस बार टमाटर की पैदावार अच्छी हुई थी और किसानों को बेहतर मुनाफे की उम्मीद थी। लेकिन जब किसान अपनी उपज बेचने जालना और छत्रपति संभाजीनगर के करमाड कृषि उपज मंडी पहुंचे, तो उन्हें मात्र 4 से 5 रुपये प्रति किलो का भाव मिला। इससे नाराज होकर किसान ने लगभग 25 क्विंटल टमाटर सड़क पर फेंक दिए।
किसानों का कहना है कि इतनी कम कीमत में उनकी लागत भी नहीं निकल पा रही है। मजदूरी, परिवहन और अन्य खर्चों को मिलाकर उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। मौजूदा हालात में टमाटर की खेती करना घाटे का सौदा साबित हो रहा है।
बाजार में एक कैरेट टमाटर की कीमत 150 से 200 रुपये के बीच है, जिसमें लगभग 20 से 23 किलो टमाटर होता है। इस हिसाब से किसानों को प्रति किलो 5 से 7 रुपये ही मिल रहे हैं। किसानों का कहना है कि कम से कम 500 से 600 रुपये प्रति कैरेट का भाव मिलने पर ही उनकी लागत निकल सकती है।
जालना और आसपास के क्षेत्रों के किसानों ने सरकार से टमाटर सहित अन्य फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तय करने और किसानों को सीधे बाजार से जोड़ने की मांग की है। लगातार गिरते दामों के कारण किसानों की आर्थिक स्थिति बिगड़ती जा रही है और वे जल्द सरकारी हस्तक्षेप की उम्मीद कर रहे हैं।