अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे को लेकर उठे विवाद के बीच अब मुंबई के प्रसिद्ध सिद्धिविनायक मंदिर का मामला भी राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने दावा किया है कि सिद्धिविनायक मंदिर में हर वर्ष करोड़ों रुपये के चढ़ावे में अनियमितता हो रही है। हालांकि, मंदिर ट्रस्ट ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए उनका खंडन किया है।
छात्र इकाई के कार्यक्रम में उठाया मुद्दा
मुंबई में मनसे की छात्र इकाई की 20वीं वर्षगांठ पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज ठाकरे ने मंदिरों में चढ़ावे के प्रबंधन पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि श्रद्धालु आस्था के साथ मंदिरों में दान करते हैं, लेकिन यदि उसी धन के उपयोग और सुरक्षा पर सवाल उठने लगें तो यह गंभीर चिंता का विषय है।
राम मंदिर का भी किया जिक्र
अपने संबोधन के दौरान राज ठाकरे ने अयोध्या के राम मंदिर में कथित वित्तीय अनियमितताओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले पर केंद्र और भाजपा नेतृत्व की ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। उन्होंने कहा कि इस तरह के मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहे।
ट्रस्टियों के पत्र का किया हवाला
मनसे प्रमुख ने दावा किया कि सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट के कुछ न्यासियों ने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को पत्र लिखकर दान पेटी से जुड़े मामलों की जांच की मांग की है। उनके अनुसार, पत्र में कुछ कर्मचारियों पर चढ़ावे में गड़बड़ी के आरोप लगाए गए हैं। राज ठाकरे ने कहा कि कथित रूप से कुछ कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के बाद मंदिर में मिलने वाले दान की राशि में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसी आधार पर उन्होंने अनुमान जताया कि पहले हर साल लगभग 18 करोड़ रुपये तक की अनियमितता हो रही थी। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
मंदिर ट्रस्ट ने आरोपों को बताया भ्रामक
सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष और शिवसेना नेता सदा सर्वंकर ने राज ठाकरे के आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि ट्रस्टियों के पत्र का गलत अर्थ निकाला गया है और 18 करोड़ रुपये के किसी घोटाले की शिकायत नहीं की गई थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच के दौरान कुछ कर्मचारियों द्वारा दान राशि में गड़बड़ी और श्रद्धालुओं से विशेष दर्शन के नाम पर पैसे लेने जैसी शिकायतें सामने आई थीं, जिन पर ट्रस्ट ने तत्काल कार्रवाई की। संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ आवश्यक मामलों में पुलिस शिकायत भी दर्ज कराई गई।
ट्रस्ट का दावा- सुधारों से बढ़ी आय
सदा सर्वंकर ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में मंदिर प्रबंधन में पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया गया है। उनका दावा है कि इसी का परिणाम है कि मंदिर की वार्षिक आय करीब 114 करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 182 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। फिलहाल राज ठाकरे के आरोपों और मंदिर ट्रस्ट के जवाब के बाद यह मुद्दा राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है। मामले को लेकर विभिन्न पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं, जबकि किसी भी बड़े वित्तीय घोटाले की आधिकारिक पुष्टि अब तक नहीं हुई है।