नई दिल्ली/इस्लामाबाद। शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के वर्ष 2027 के शिखर सम्मेलन की मेजबानी पाकिस्तान करेगा। इस बीच पाकिस्तान की ओर से संकेत मिले हैं कि संगठन की परंपरा के तहत सभी सदस्य देशों के प्रमुखों को सम्मेलन में आमंत्रित किया जाएगा। ऐसे में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी औपचारिक निमंत्रण भेजे जाने की संभावना जताई जा रही है। यह चर्चा ऐसे समय सामने आई है जब हाल के महीनों में भारत-पाकिस्तान संबंध कई मुद्दों को लेकर सुर्खियों में रहे हैं।
पाकिस्तान ने क्या कहा?
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने हालिया मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि एससीओ की परंपरा और प्रोटोकॉल के अनुसार मेजबान देश सभी सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों और शासनाध्यक्षों को सम्मेलन में आमंत्रित करता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्ष 2027 के सम्मेलन में भी सभी सदस्य देशों को औपचारिक निमंत्रण भेजा जाएगा। हालांकि, प्रवक्ता ने इस बात पर कोई टिप्पणी नहीं की कि सम्मेलन के इतर भारत और पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व के बीच किसी द्विपक्षीय वार्ता की संभावना है या नहीं।
जयशंकर और पाकिस्तानी विदेश मंत्री की संभावित मुलाकात पर जवाब
मीडिया ब्रीफिंग के दौरान फिलीपींस की राजधानी मनीला में आसियान (ASEAN) बैठकों के दौरान भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और पाकिस्तान के विदेश मंत्री के बीच संभावित मुलाकात को लेकर भी सवाल पूछा गया। इस पर पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने कहा कि उन्हें भारत की ओर से ऐसी किसी बैठक के लिए कोई औपचारिक अनुरोध प्राप्त नहीं हुआ है।
हर साल बदलती है मेजबानी
शंघाई सहयोग संगठन का वार्षिक शिखर सम्मेलन सदस्य देशों के बीच तय प्रक्रिया के तहत आयोजित किया जाता है। इसकी अध्यक्षता और मेजबानी क्रमवार सदस्य देशों के बीच बदलती रहती है। संगठन का सर्वोच्च निर्णय लेने वाला निकाय काउंसिल ऑफ हेड्स ऑफ स्टेट है, जिसकी बैठक में सदस्य देशों के शीर्ष नेता शामिल होते हैं।
SCO में कौन-कौन से देश हैं शामिल?
वर्तमान में शंघाई सहयोग संगठन के 10 सदस्य देश हैं—
भारत
पाकिस्तान
चीन
रूस
कजाकिस्तान
किर्गिस्तान
ताजिकिस्तान
उज्बेकिस्तान
ईरान
बेलारूस
2001 में हुई थी संगठन की स्थापना
शंघाई सहयोग संगठन की स्थापना 15 जून 2001 को चीन के बीजिंग में हुई थी। संगठन का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग, आतंकवाद-रोधी प्रयासों और बहुपक्षीय समन्वय को मजबूत करना है। समय के साथ इसका दायरा बढ़ा है और यह यूरो-एशियाई क्षेत्र के प्रमुख बहुपक्षीय संगठनों में शामिल हो चुका है.