उत्तर प्रदेश के रामपुर स्थित जौहर यूनिवर्सिटी की 38 इमारतों को गिराने के आदेश के खिलाफ दायर अपील पर गुरुवार (13 अगस्त) को मुरादाबाद मंडलायुक्त आञ्जनेय कुमार सिंह की अदालत में सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद मंडलायुक्त ने रामपुर जिला प्रशासन के ध्वस्तीकरण आदेश पर पहले से लगी अंतरिम रोक को बरकरार रखा है। इसके साथ ही फिलहाल यूनिवर्सिटी की 38 इमारतों पर बुलडोजर कार्रवाई नहीं होगी।
सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी दलीलें पेश कीं। जौहर यूनिवर्सिटी के अधिवक्ता जुनैद एजाज ने बताया कि मंडलायुक्त द्वारा एसडीएम रामपुर से मांगी गई रिपोर्ट अभी तक प्रस्तुत नहीं की गई है। वहीं, रामपुर डेवलपमेंट अथॉरिटी (RDA) के अधिवक्ता ने कहा कि एसडीएम की रिपोर्ट अधूरी थी, इसलिए उसे वापस भेज दिया गया है। फिलहाल मामले की अगली सुनवाई की तारीख तय नहीं की गई है।
यह मामला जौहर यूनिवर्सिटी की कुल 40 में से 38 इमारतों को ध्वस्त करने के प्रस्ताव से जुड़ा है। रामपुर डेवलपमेंट अथॉरिटी ने उत्तर प्रदेश शहरी योजना एवं विकास अधिनियम, 1973 की धारा 27(1) के तहत कार्रवाई करते हुए आरोप लगाया है कि इन इमारतों का निर्माण भवन मानचित्र की मंजूरी लिए बिना किया गया था।
गौरतलब है कि जौहर यूनिवर्सिटी की स्थापना समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री आजम खान ने की थी। इससे पहले 27 जुलाई को मंडलायुक्त ने ध्वस्तीकरण आदेश पर अंतरिम रोक लगाई थी, जिसे बाद में 3 अगस्त की सुनवाई में बढ़ाकर 10 अगस्त तक कर दिया गया था। अब 13 अगस्त की सुनवाई के बाद भी यह अंतरिम राहत जारी रखी गई है।