रिपोर्ट : अनुराग श्रीवास्तव – कानपुर
कानपुर के चन्द्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (CSA) के विशाल मैदान में गुरुवार को उत्तर प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत अद्भुत नजारा देखने को मिला जहाँ एक ही पंडाल, एक ही मंच और एक ही दिन में 540 हिन्दू जोड़ों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सात फेरे लिए तो ठीक उसी मंच पर 11 मुस्लिम जोड़ों ने काजी की मौजूदगी में गरिमापूर्ण निकाह पढ़ा। कुल 551 नवदंपतियों ने एक साथ वैवाहिक जीवन का बंधन बांधा और पूरा मैदान खुशियों, मंत्र, दुआ, ढोल-नगाड़ों और पुष्पवर्षा से सराबोर हो गया।
कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष स्वप्निल वरुण, विधायक महेश त्रिवेदी, नीलिमा कटियार, सुरेंद्र मैथानी, सरोज कुरील, एमएलसी सलिल बिश्नोई, जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह, मुख्य विकास अधिकारी दीक्षा जैन, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट/एसडीएम सदर अनुभव तिवारी, जिला समाज कल्याण अधिकारी शिल्पी सिंह सहित तमाम जनप्रतिनिधि एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। सभी ने नवदंपतियों पर फूल बरसाए और उनके सुखी वैवाहिक जीवन की कामना की।
पारदर्शिता का नया मानक स्थापित करते हुए हर जोड़े का बायोमेट्रिक एवं फेस अटेंडेंस से सत्यापन किया गया। सत्यापन के बाद प्रत्येक दंपति को विशेष चिन्हांकन बैंड पहनाया गया। जिलाधिकारी के सख्त निर्देश पर पंडाल की भव्य सजावट, पर्याप्त प्रकाश, शुद्ध पेयजल, स्वादिष्ट भोजन और चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था रही। लाखों की भीड़ के बावजूद एक भी अप्रिय घटना नहीं हुई।
योजना के तहत प्रत्येक जोड़े को एक लाख रुपये की सहायता दी जाती है, जिसमें 51 हजार रुपये सीधे कन्या के खाते में डीबीटी, 35 हजार की 22 प्रकार की वैवाहिक सामग्री और शेष राशि आयोजन व्यय में उपयोग होती है। इस योजना से निराश्रित, विधवा, परित्यक्ता व तलाकशुदा महिलाओं को भी सम्मानजनक विवाह का अवसर मिलता है।
लाभार्थियों में शिवराजपुर की रेखा कुशवाहा ने कहा, “हमारी भांजी का विवाह इतने बड़े मंच पर हुआ, यह हमारे परिवार के लिए जीवनभर का गर्व है। योगी जी का हार्दिक आभार।” वहीं दूल्हा आदित्य ने बताया, “इतना भव्य और सुव्यवस्थित आयोजन हमने सपने में भी नहीं सोचा था।”
भोजन वितरण के समय थोड़ी देर के लिए कतारें लगीं, लेकिन एडीएम सिटी राजेश कुमार, जिला आपूर्ति अधिकारी राकेश कुमार एवं सहायक आयुक्त खाद्य संजय सिंह ने तुरंत अतिरिक्त स्टाफ लगवाकर 10-15 मिनट में सब सामान्य कर दिया।
वैदिक मंत्रों की गूंज, कुरान की तिलावत, दुआएँ और परिवारों की खुशी ने मिलकर ऐसा वातावरण बनाया जो सामाजिक समरसता, सर्वधर्म समभाव और सरकारी संवेदनशीलता का जीता-जागता प्रमाण बन गया। यह आयोजन सिर्फ 551 विवाहों का समारोह नहीं, बल्कि गरीब बेटियों के सम्मान और सैकड़ों परिवारों की जिंदगी में रोशनी भरने वाला ऐतिहासिक पर्व बन गया।