हिमाचल प्रदेश से राज्यसभा की एकमात्र सीट के लिए होने वाले चुनाव से पहले मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू रविवार को नई दिल्ली रवाना हो गए। उनका यह दौरा राजनीतिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है। चर्चा है कि पार्टी इस बार किसी केंद्रीय नेता को उम्मीदवार बनाए या फिर हिमाचल मूल के चेहरे पर दांव लगाए, इस पर गहन मंथन चल रहा है। मुख्यमंत्री सोमवार को केंद्रीय नेतृत्व से मुलाकात कर सकते हैं, जहां प्रत्याशी के नाम पर सहमति बनने की संभावना है।
प्रदेश से राज्यसभा सांसद इंदु गोस्वामी का कार्यकाल 9 अप्रैल को समाप्त हो रहा है, जिससे यह सीट रिक्त हो जाएगी। चुनाव की अधिसूचना जारी हो चुकी है और नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 5 मार्च तय की गई है। 4 मार्च को होली के अवकाश के कारण नामांकन के लिए केवल तीन कार्यदिवस ही उपलब्ध हैं। कांग्रेस ने अभी तक अपने उम्मीदवार के नाम की घोषणा नहीं की है, जबकि भाजपा ने भी प्रत्याशी को लेकर पत्ते नहीं खोले हैं।
वर्ष 2024 के राज्यसभा चुनाव के घटनाक्रम को देखते हुए कांग्रेस इस बार कोई जोखिम नहीं लेना चाहती। 2024 में केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा के कार्यकाल के बाद खाली हुई सीट पर हुए चुनाव में कांग्रेस को झटका लगा था। छह विधायकों की क्रॉस वोटिंग और तीन निर्दलीय विधायकों के समर्थन से भाजपा प्रत्याशी हर्ष महाजन विजयी हुए थे, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार को हार का सामना करना पड़ा था। इसी अनुभव को ध्यान में रखते हुए पार्टी नेतृत्व इस बार उम्मीदवार चयन में पूरी सतर्कता बरत रहा है। मुख्यमंत्री सुक्खू का दिल्ली दौरा इसी रणनीतिक कवायद का हिस्सा माना जा रहा है।
राज्यसभा सीट के लिए कांग्रेस में कई नाम चर्चा में हैं। केंद्रीय स्तर पर प्रदेश प्रभारी रजनी पाटिल और पार्टी प्रवक्ता पवन खेड़ा के नाम पर विचार चल रहा है। इसके अलावा पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा भी प्रमुख दावेदारों में शामिल हैं, जो पहले भी राज्यसभा सदस्य रह चुके हैं। संभावित नामों में स्वास्थ्य मंत्री धनीराम शांडिल, पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह, पूर्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर और आशा कुमारी के अलावा मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार सुनील शर्मा बिट्टू, आईटी सलाहकार गोकुल बुटेल तथा प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान के नाम भी संभावित प्रत्याशियों में शामिल बताए जा रहे हैं।