नई दिल्ली: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री आजम खान को प्रवर्तन निदेशालय (ED) की गिरफ्तारी के मामले में सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल राहत नहीं मिली है. शीर्ष अदालत ने उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए इसे इलाहाबाद हाईकोर्ट भेज दिया है. आजम खान ने ED की ओर से की गई गिरफ्तारी को चुनौती दी थी. उनका आरोप है कि 29 अक्टूबर को जेल से रिहाई के महज 40 मिनट बाद ही ED ने उन्हें दोबारा गिरफ्तार कर लिया था. गुरुवार को चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने मामले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई के लिए भेजने का निर्देश दिया. सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल से कहा है कि इस मामले को 16 नवंबर को डिवीजन बेंच के सामने सूचीबद्ध किया जाए. साथ ही केस से जुड़े सभी दस्तावेज दो दिनों के भीतर हाईकोर्ट भेजने का निर्देश भी दिया गया है.
कपिल सिब्बल ने गिरफ्तारी को बताया राजनीतिक कार्रवाई
सुनवाई के दौरान आजम खान की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल पेश हुए. उन्होंने ED की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे राजनीतिक बदले की भावना से की गई गिरफ्तारी बताया. सिब्बल ने दलील दी कि आजम खान को अन्य मामलों में जमानत मिल चुकी थी, लेकिन जेल से बाहर निकलने के कुछ ही मिनट बाद उन्हें ED ने गिरफ्तार कर लिया. उन्होंने आशंका जताई कि आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को देखते हुए आजम खान को जेल में रखने के उद्देश्य से यह कार्रवाई की गई है. सिब्बल ने मामले की समयसीमा पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि कथित घटना 2006 की है, जबकि इस संबंध में FIR वर्ष 2019 में दर्ज की गई थी. सुनवाई के दौरान सिब्बल ने शिकायतों में बकरियों और गायों को भी कथित अपराध से अर्जित संपत्ति के तौर पर शामिल किए जाने का मुद्दा उठाया. उन्होंने ED की कार्रवाई और जांच के आधार पर भी सवाल खड़े किए.
CJI सूर्यकांत ने कहा- दलीलों में दम हो सकता है
मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि याचिकाकर्ता की दलीलों में कुछ दम हो सकता है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट इस मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता. इसी के साथ अदालत ने मामले को इलाहाबाद हाईकोर्ट भेजने का फैसला किया, ताकि वहां इस पर सुनवाई हो सके. आजम खान ने ED की गिरफ्तारी के अलावा एक नवंबर को विशेष अदालत की ओर से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने के आदेश को भी चुनौती दी है. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत देते हुए जेल से रिहा करने की मांग की थी. हालांकि, शीर्ष अदालत ने फिलहाल इस मामले में कोई राहत देने के बजाय सुनवाई के लिए हाईकोर्ट का रुख करने का निर्देश दिया है.
PMLA कोर्ट ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा था
इससे पहले गाजियाबाद की PMLA विशेष अदालत ने आजम खान को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया था. अदालत में पेशी के बाद जब मीडिया ने उनसे सवाल किया तो उन्होंने कहा था, ‘अब कहने के लिए बचा ही क्या है?’ ED से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, वर्ष 2019 में आजम खान के खिलाफ 26 मामले दर्ज किए गए थे. इसके बाद एजेंसी ने 1 अगस्त 2019 को उनके खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत मामला दर्ज किया था. अब ED की गिरफ्तारी को लेकर आजम खान की याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनी जाएगी.